ईरान ने तुर्किये में US बेस पर दागी मिसाइलें, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran Attacks US Nuclear Base Turkey Incirlik: पश्चिम एशिया में तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहाँ से वापसी की राह मुश्किल नजर आ रही है। 13 मार्च 2026 को ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिकी और नाटो (NATO) ठिकानों को निशाना बनाकर दुनिया को हिला कर रख दिया है। ईरान द्वारा किए गए इन हमलों ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल दिया है, बल्कि एक परमाणु संघर्ष की आशंका को भी जन्म दे दिया है।
ईरान ने तुर्किये के Incirlik Airbase पर मिसाइलें दागकर सीधे तौर पर अमेरिका को चुनौती दी है। तुर्किये के रक्षा मंत्रालय ने इस हमले की पुष्टि की है और कहा है कि वे स्थिति को लेकर ईरान के संपर्क में हैं। यह हमला इसलिए गंभीर है क्योंकि इंसर्लिक एयरबेस पर अमेरिका के टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन तैनात हैं। हालांकि, पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात नाटो के एयर डिफेंस सिस्टम ने एक बैलिस्टिक मिसाइल को इंसर्लिक की ओर बढ़ने से पहले ही नष्ट कर दिया, जिससे एक बड़ी परमाणु त्रासदी टल गई।
ओमान सागर से आ रही खबरों के मुताबिक, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी विमानवाहक पोत ‘USS अब्राहम लिंकन‘ को मिसाइल से निशाना बनाया है। IRGC के प्रवक्ता के अनुसार, हमले के बाद अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पीछे हट गया है। हालांकि, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने इस दावे का खंडन किया है और हमले की बात से इनकार किया है।
ईरान ने अपनी आक्रामकता बढ़ाते हुए एक साथ तीन नाटो ठिकानों को निशाना बनाया है। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात के शहर दुबई पर भी बड़ा हमला किए जाने की खबरें हैं। ईरान की इस कार्रवाई के जवाब में अमेरिका ने यूरोप से अपने उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम को मिडिल ईस्ट में स्थानांतरित कर दिया है। इराक में भी तनाव चरम पर है, जहां अमेरिका ने अपने ‘लुकास ड्रोन’ के जरिए ईरान समर्थित पीएमएफ (PMF) के ठिकानों पर स्ट्राइक की है।
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ईरान के हमलों के जवाब में अमेरिका ने तेहरान के वरमिन इलाके में भीषण बमबारी की है। रिपोर्टों के अनुसार, पूर्वी तेहरान स्थित कमांड मुख्यालय पर भी एयरस्ट्राइक की गई है। इस बीच, नाटो अब एक ‘विध्वंसक जंग’ की तैयारी करता दिख रहा है। जर्मनी ने लिथुआनिया से लेकर अपनी सीमाओं तक एक विशाल सैन्य और मेडिकल इवैक्युएशन एक्सरसाइज शुरू की है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा मेडिकल ड्रिल माना जा रहा है, जो यह संकेत देता है कि पश्चिमी देश एक बड़े युद्ध में घायल होने वाले सैनिकों के प्रबंधन की तैयारी कर रहे हैं।