रूसी तेल पर भारत का कड़ा रुख: जयशंकर ने कहा, दबाव में नहीं अपने हित में लेंगे फैसले
Strategic Autonomy India: विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत रूसी तेल आयात पर स्वतंत्र निर्णय लेगा। अमेरिकी दबाव के बीच रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखने की बात कही।
- Written By: प्रिया सिंह
एस. जयशंकर और मार्को रुबियो (सोर्स-सोशल मीडिया)
The India Russia Energy Ties Are Based On National Interests And Strategic Needs: म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर देते हुए स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भारत अपने ऊर्जा हितों की सुरक्षा के लिए किसी भी बाहरी दबाव के बिना स्वतंत्र फैसले लेने के लिए प्रतिबद्ध है। यह बयान अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो के उस दावे के बाद आया है जिसमें उन्होंने भारत द्वारा रूसी तेल खरीद सीमित करने की बात कही थी।
जयशंकर का दोटूक जवाब
विदेश मंत्री जयशंकर ने म्यूनिख में स्पष्ट किया कि रणनीतिक स्वायत्तता भारत के इतिहास और राजनीतिक परंपरा का एक अटूट हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि आज का ऊर्जा बाजार अत्यंत जटिल है और तेल कंपनियां उपलब्धता और लागत के आधार पर अपने व्यावसायिक निर्णय लेती हैं। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि अगर भारत के फैसले दूसरों की सोच से मेल नहीं खाते, तो भी भारत अपने हित में स्वतंत्र चुनाव करेगा।
अमेरिकी दावों की हकीकत
दूसरी ओर अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने दावा किया कि वाशिंगटन को भारत की ओर से अतिरिक्त रूसी तेल खरीद रोकने का आश्वासन मिला है। रुबियो का कहना है कि अमेरिका ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर नए कड़े प्रतिबंध लगाए हैं ताकि यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी आय को सीमित किया जा सके। हालांकि भारत सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर ऐसे किसी भी ठोस वादे की पुष्टि नहीं की है और अपनी स्वायत्तता पर अडिग है।
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रूस और भारत का पक्ष
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा कि भारत सरकार की ओर से उन्हें ऐसा कोई भी संदेश प्राप्त नहीं हुआ है। वर्तमान में भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा रूस से आयात करता है जो उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत ने यूक्रेन युद्ध के बाद से लगातार रियायती दरों पर रूसी कच्चा तेल खरीदकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है।
अमेरिका के साथ बढ़ता सहयोग
हालांकि भारत ने रूस से संबंध बनाए रखे हैं लेकिन वह अमेरिका के साथ भी अपने ऊर्जा और व्यापारिक रिश्तों को लगातार विस्तार दे रहा है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार अमेरिकी कच्चा तेल अब भारत के कुल तेल आयात का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है जो एक महत्वपूर्ण वृद्धि है। इसके अलावा भारत ने अमेरिकी एलपीजी और अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया है जो संतुलित कूटनीति का एक बड़ा हिस्सा है।
राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर ने बार-बार दोहराया है कि भारत अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद केवल अपने राष्ट्रीय हितों को ही प्राथमिकता देगा। पश्चिमी प्रतिबंधों और मास्को के साथ पुराने अटूट संबंधों के बीच भारत एक बहुत ही संतुलित और परिपक्व कूटनीतिक रास्ता अपना रहा है। रणनीतिक स्वायत्तता की यह नीति सुनिश्चित करती है कि भारत वैश्विक राजनीति में एक स्वतंत्र शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभाता रहे।
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कठिन वैश्विक संतुलन
विशेषज्ञों के अनुसार भारत के लिए रूस और अमेरिका के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है लेकिन जयशंकर ने इसे बखूबी संभाला है। उन्होंने सम्मेलन में यह स्पष्ट कर दिया कि भारत की विदेश नीति किसी भी ब्लॉक का हिस्सा बनने के बजाय अपने नागरिकों के लाभ के लिए है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी व्यापार समझौते और रूसी ऊर्जा संबंधों को भारत किस तरह एक साथ आगे बढ़ाता है।
