UNSC में सुधार को लेकर भारत का कड़ा रुख, संयुक्त राष्ट्र में पेश ‘दस्तावेज’ पर उठाए सवाल
UNSC Reform: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और स्थायी सदस्यता के मुद्दे पर भारत ने सख्त रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावित दस्तावेज को लेकर भारत ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
- Written By: दिव्या सिंह
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथानेनी (सोर्स- सोशल मीडिया)
India Takes Stand on UNSC Reform: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की लंबे समय से चल रही मांग के बीच भारत ने अब तक का सबसे आक्रामक रुख अपनाया है। सुरक्षा परिषद सुधार प्रक्रिया के तहत तैयार किए गए हालिया ‘एलिमेंट्स पेपर’ पर भारत ने गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे असंतुलित और पक्षपातपूर्ण करार दिया है।
इस मामले में भारत का कहना है कि यह दस्तावेज पक्षपातपूर्ण है, इसमें सदस्य देशों की राय को गलत तरीके से पेश किया गया है और स्थायी सीटों को बढ़ाने के भारी समर्थन को जानबूझकर छिपाने की कोशिश की गई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने सोमवार को इस बैठक को संबोधित करते हुए भारत का पक्ष रखा और इस दस्तावेज के खिलाफ कड़े सवाल उठाए।
विकासशील देशों की आवाज को दबाती है वीटो पावर
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को आज के दौर में ‘शीत युद्ध’ के जमाने का एक ऐसा ढांचा माना जाता है, जो 1945 की दुनिया के हिसाब से जमा हुआ है। इसके 5 स्थायी सदस्यों (P5) अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के पास वीटो पावर है। आलोचकों का कहना है कि यह वीटो पावर आज की दुनिया की सच्चाई और विकासशील देशों की आवाज को दबाती है। ऐसे में भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील (G4 ग्रुप) के साथ-साथ अफ्रीकी देश और कई विकासशील देश सालों से इस व्यवस्था को बदलने और खुद के लिए स्थायी सदस्यता की मांग कर रहे हैं।
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नए पेपर पर कई मोर्चों पर खड़े किए सवाल
भारत का पक्ष रखते हुए राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने इस नए पेपर पर कई मोर्चों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने सबसे पहले कम समय देने का हवाला देते हुए कहा कि यह पेपर 10 जून को जारी किया गया और सदस्य देशों को इस पर जवाब देने के लिए सिर्फ दो वर्किंग डे का समय दिया गया, जो कि बहुत कम था।
भारत ने इस बात पर जताई कड़ी आपत्ति
भारत ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि दुनिया के ज्यादातर देश (जैसे G4, अफ्रीकी देश और छोटे द्वीपीय देश) सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटें बढ़ाने के पक्ष में हैं, लेकिन इस पेपर में इस भारी बहुमत को जानबूझकर ‘कुछ देशों का समर्थन’ कहकर हल्का कर दिया गया। इसके साथ ही इस पेपर को लेकर पर्वथानेनी का कहना है कि पेपर में इस्तेमाल किए गए शब्द और परिभाषाएं साफ नहीं हैं और इन्हें अपनी मर्जी से तोड़-मरोड़ कर लिखा गया है।
पेपर में स्थायी सदस्यता बढ़ाने के लिए ‘फिक्स्ड रीजनल सीट्स’ (क्षेत्रीय सीटें) का एक प्रस्ताव दिया गया था। भारत ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। भारत का कहना है कि इससे वास्तविक स्थायित्व नहीं आएगा और यह छोटे देशों के हितों को नुकसान पहुंचाएगा।
अब सिर्फ बातों से नहीं चलेगा काम
इसके अलावा भारत ने संयुक्त राष्ट्र से साफ शब्दों में मांग की है कि अब केवल बैठकों और चर्चाओं का दौर बंद होना चाहिए। भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद के सुधारों के लिए अब एक औपचारिक ‘नेगोशिएटिंग टेक्स्ट’ तैयार किया जाए, जिस पर सभी देश सीधे तौर पर बातचीत कर सकें। इसके साथ ही इस काम को पूरा करने की एक निश्चित समय सीमा (डेडलाइन) भी तय की जाए। राजदूत पर्वथनेनी ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो देश यथास्थिति बनाए रखना चाहते हैं (बदलाव नहीं चाहते), वे इस प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए लटकाने के लिए नियम-कानूनों का गलत इस्तेमाल न करें।
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आर-पार के मूड में भारत
बता दें कि, संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के 80 साल पूरे होने जा रहे हैं और ऐसे समय में इस वैश्विक संस्था की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सोमवार को हुई इस बैठक से साफ हो गया है कि दुनिया की बढ़ती भू-राजनीतिक हलचलों के बीच भारत अब किसी भी तरह के आधे-अधूरे उपायों या टालमटोल को स्वीकार करने के मूड में नहीं है और वह सुरक्षा परिषद में अपनी स्थायी जगह के लिए पूरी मजबूती से अड़ा हुआ है।
