Nepal Tea Dispute: सीमा पर फंसी 13 लाख किलो चाय, सख्त टेस्टिंग से नेपाली फैक्ट्रियों पर लगा ताला

Nepal Tea Dispute: नेपाल-भारत के बीच चाय निर्यात को लेकर तनाव बहुत बढ़ गया है। सीमा पर टेस्टिंग के नए नियमों के कारण नेपाली चाय फैक्ट्रियों में उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया है जिससे भारी संकट है।
Nepal Tea Dispute: 13 Lakh Kg Nepali Tea Stuck At Border Amid Strict Quality Testing Crisis Now
नेपाल चाय विवाद (सोर्स- सोशल मीडिया)
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India-Nepal Tea Dispute News: भारत और नेपाल के बीच चाय के भारी निर्यात को लेकर बहुत बड़ा विवाद खड़ा हो गया है जिसने व्यापार को बुरी तरह ठप कर दिया है। भारतीय फूड सेफ्टी अथॉरिटी के सख्त नियमों के कारण नेपाली चाय का निर्यात पूरी तरह से रुक गया है और भारी तनाव पैदा हो गया है। नेपाल के प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के हस्तक्षेप के बाद इस गंभीर मसले को सुलझाने की कूटनीतिक कोशिशें अब तेजी से शुरू कर दी गई हैं। सरकार के ठोस आश्वासन के बाद बंद पड़ी चाय फैक्ट्रियों में धीरे-धीरे फिर से काम शुरू होने की एक बहुत बड़ी उम्मीद जगी है।

भारत के नए और सख्त नियमों के अनुसार सीमा पर नेपाली चाय के ट्रकों की बहुत ही सघन जांच की जा रही है। पहले सिर्फ कुछ ही सैंपल जांच के लिए जाते थे लेकिन अब सख्त निगरानी के कारण कोलकाता लैब से रिपोर्ट आने में 20 दिन लग रहे हैं। इस भारी देरी की वजह से 13 लाख किलो से भी अधिक चाय बॉर्डर पर फंसी हुई है और बुरी तरह से सड़ने की कगार पर है। इससे नेपाली चाय उद्योग से जुड़े हजारों बेबस किसानों और मजदूरों के सामने अपनी रोजी-रोटी का बहुत बड़ा और गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

चाय फैक्ट्रियों पर पड़ा ताला

भारत द्वारा सीमा पर टेस्टिंग नियमों को सख्त करने से नेपाली चाय उद्योग पूरी तरह से ठप पड़ गया है। इलाम में 15 जून और झापा में 18 जून से लगभग 99 चाय फैक्ट्रियों और 50 बागानों में काम पूरी तरह से रुक गया है। इस कारण 60,000 से अधिक दिहाड़ी मजदूरों की रोजी-रोटी छिनने की कगार पर आ गई है जिससे हालात बहुत खराब हैं। सरकार के ठोस कूटनीतिक आश्वासन के बाद ही फैक्टरी मालिकों ने फिर से अपना जरूरी काम शुरू किया है।

सीमा पर सड़ रही 13 लाख किलो चाय

काठमांडू पोस्ट के अनुसार सीमा पर ट्रकों को नई और सख्त लैब टेस्टिंग के लिए बहुत लंबे समय तक रोका जा रहा है। वर्तमान में करीब 3,00,000 किलोग्राम प्रोसेस्ड चाय भारत के गोदामों में और 10 लाख किलोग्राम से ज्यादा नेपाल में फंसी है। कोलकाता की लैब से रिपोर्ट आने में 15 से 20 दिन का बहुत लंबा समय लग रहा है। इस भारी देरी की वजह से चाय सड़ रही है और किसानों को रोजाना करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

एफएसएसएआई के सख्त नए नियम

भारत की फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ने 23 जून को HSN कोड 0902 के तहत आने वाली चाय के लिए नया निर्देश जारी किया है। इसके तहत घरेलू खपत के लिए आने वाली 20 प्रतिशत चाय की खेप को रैंडम लैब टेस्टिंग के लिए चुना जाएगा। भारतीय उत्पादकों की गंभीर शिकायत थी कि नेपाल की सस्ती चाय को प्रीमियम दार्जिलिंग चाय के साथ मिलाया जा रहा है। इसके अलावा नेपाली चाय में कीटनाशकों और रसायनों की मात्रा अधिक होने की भी प्रमुख बातें सामने आई थीं।

नेपाल का पलटवार और कीमतें धड़ाम

चाय उद्योग में आए इस भारी संकट से नेपाल में चाय पत्ती की कीमतें 40-60 रुपये से गिरकर सीधे 15 रुपये पर आ गई हैं। कूटनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि यह भारत का कूटनीतिक जवाबी कदम हो सकता है क्योंकि नेपाल ने भी कुछ फल रोके थे। नेपाल ने हाल ही में भारत से जाने वाले आम और अन्य फलों पर सख्त क्वालिटी टेस्ट और नए टैक्स थोप दिए थे। भारत ने चाय पर नकेल कसकर नेपाल को बहुत ही कड़ा और स्पष्ट संदेश मजबूती के साथ दिया है।

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