

Balen Shah On India Nepal Border Dispute: भारत और नेपाल के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद को लेकर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने स्पष्टीकरण जारी किया है। रविवार को दक्षिणी चितवन जिले में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के महाधिवेशन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री शाह ने उन अटकलों और आलोचनाओं पर विराम लगा दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि नेपाल इस विवाद में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की तलाश कर रहा है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि नेपाल अपने पड़ोसी देशों के साथ सीमा संबंधी मुद्दों को सीधे बातचीत और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर सुलझाना चाहता है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने पिछले महीने संसद के निचले सदन में दिए गए अपने उस बयान पर सफाई दी, जिसमें उन्होंने यूनाइटेड किंगडम (UK) की भूमिका का जिक्र किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य ब्रिटेन को मध्यस्थ बनाना नहीं था, बल्कि केवल उस समय के ऐतिहासिक रिकॉर्ड तक पहुंच बनाना था जब ब्रिटिश भारत पर शासन करते थे। शाह ने कहा कि कालापानी और लिपुलेख के संबंध में हमारे पास ठोस सबूत हैं। मेरा मतलब सिर्फ इतना था कि अगर ब्रिटिश शासनकाल के रिकॉर्ड पेश करने की जरूरत पड़ी, तो हम उन्हें प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी राष्ट्रभक्ति पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए।
इससे पहले प्रधानमंत्री शाह के उस बयान की काफी आलोचना हुई थी जिसमें उन्होंने कहा था कि जिस तरह नेपाल भारत पर अतिक्रमण के आरोप लगाता है, उसी तरह नेपाल ने भी भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है। इस बयान को लेकर विपक्षी दलों और विदेश नीति विशेषज्ञों ने कड़ा ऐतराज जताया था। अब ताजा स्पष्टीकरण में शाह ने कहा कि नेपाल अपने पड़ोसियों के साथ चर्चा करके इन मामलों का समाधान खुद करेगा और इसके लिए किसी तीसरे देश की भागीदारी की आवश्यकता नहीं है।
नेपाल के प्रधानमंत्री के रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पहले ही अपनी स्थिति साफ कर दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जून की शुरुआत में कहा था कि भारत और नेपाल के बीच सीमा संबंधी मुद्दों के समाधान में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। भारत का मानना है कि दोनों देशों के बीच पहले से ही स्थापित द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं, जो ऐसे संवेदनशील मुद्दों को सुलझाने के लिए पर्याप्त और सही माध्यम हैं।
गौरतलब है कि भारत और नेपाल के बीच लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्रों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। वर्तमान में ये क्षेत्र भारत के प्रशासनिक नियंत्रण में हैं, लेकिन नेपाल ऐतिहासिक संधियों का हवाला देते हुए इन्हें अपनी संप्रभु भूमि बताता रहा है। दोनों देशों ने अब यह सहमति जताई है कि लंबित सीमा विवादों का समाधान कूटनीतिक बातचीत और आपसी समझ के जरिए किया जाना चाहिए, ताकि द्विपक्षीय संबंधों पर इसका विपरीत असर न पड़े।