तहव्वुर राणा पर जीतकर भी हारा भारत? अमेरिका ने प्यादे को सौंपकर बचा लिया राजा
Tahawwur Rana: तहव्वुर राणा की भारत वापसी को भारतीय डिप्लोमेसी और सुरक्षा एजेंसियों की एक अहम सफलता के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, पूर्व गृह सचिव जी.के. पिल्लई ने अमेरिका की ओर से डेविड कोलमैन हेडली को भारत न..
- Written By: अमन उपाध्याय
तहव्वुर राणा, (डिजाइन फोटो)
वॉशिंगटन: मुंबई 26/11 आतंकी हमले में अहम भूमिका निभाने वाला तहव्वुर राणा अब भारत पहुंच चुका है। अमेरिका से राणा के प्रत्यर्पण को भारत सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और कूटनीति की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। हालांकि, अमेरिका की मंशा को लेकर कई लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लई ने बुधवार को कहा कि तहव्वुर राणा की इस हमले में भूमिका अपेक्षाकृत “छोटी” थी, जबकि असली मास्टरमाइंड डेविड कोलमैन हेडली को अमेरिकी सरकार का संरक्षण मिला हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने जानबूझकर हेडली को भारत विरोधी गतिविधियाँ जारी रखने की छूट दी, जबकि वह पहले से इस आतंकी साजिश की जानकारी रखता था।
हेडली की भूमिका कहीं अधिक
पिल्लई के अलावा भी कई लोगों ने यह सवाल उठाया है कि जब हेडली की भूमिका कहीं अधिक बड़ी थी, तो उसे अमेरिका ने भारत को क्यों नहीं सौंपा। एक साक्षात्कार में पिल्लई ने अमेरिका पर “दुर्भावनापूर्ण मंशा” से काम करने का आरोप लगाया।
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पूर्व भारतीय अधिकारी ने कहा कि डेविड कोलमैन हेडली एक दोहरे एजेंट की भूमिका निभा रहा था। वह एक साथ अमेरिकी सरकार और पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के लिए काम कर रहा था। उन्होंने बताया कि 2009 में जब हेडली को गिरफ्तार किया गया, तो अमेरिका ने उसके साथ एक दलील-सौदेबाजी (plea bargain) कर ली, जिससे भारत में उसका प्रत्यर्पण रुक गया।
अमेरिका का रुख गैर-जिम्मेदाराना
जी.के. पिल्लई ने कहा कि 26/11 हमलों के बाद भी हेडली मुंबई आया था। अगर भारत को यह जानकारी होती कि वह हमले की योजना और समर्थन में शामिल है, तो उसे वहीं गिरफ्तार किया जा सकता था। उन्होंने अमेरिकी रुख को गैर-जिम्मेदाराना बताया और कहा कि यह घटना साफ दिखाती है कि अमेरिका सिर्फ अपने फायदे की सोचता है और दूसरों के हितों की कोई परवाह नहीं करता।
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हेडली ने भारत में उन स्थानों की रेकी की
पूर्व भारतीय अधिकारी पिल्लई ने तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण की अहमियत पर कहा कि राणा की भूमिका सीमित और काफी हद तक निष्क्रिय थी। उनका कहना था कि राणा ने हेडली को भारत लाने के लिए एक तरह का कानूनी कवर देने में मदद की थी। उनकी भूमिका मुख्यतः मुंबई में एक आव्रजन कार्यालय खोलने और हेडली की वहां तैनाती सुनिश्चित करने तक सीमित थी। हेडली ने भारत में रहते हुए उन स्थानों की रेकी की जहाँ से आतंकवादियों की नाव उतरी थी, और यह सारी जानकारी उसने ISI को पहुंचाई थी।
मुंबई हमले में गई 166 लोगों की जान
बता दें कि पिल्लई के कार्यकाल के दौरान ही अक्टूबर 2009 में अमेरिकी अधिकारियों ने डेविड हेडली और तहव्वुर राणा को गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी मुंबई में हुए आतंकी हमले के लगभग एक साल बाद हुई थी, जिसमें 166 लोगों की जान गई थी। पिल्लई ने कहा कि जब मैं गृह सचिव था, उस समय हेडली की गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन कानूनी प्रक्रिया, खासकर प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में काफी समय लगता है। हालांकि, अंत में यह प्रक्रिया पूरी हो गई।”
