विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
India Concerned Lebanon Conflict: पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल छंटने के बजाय अब और अधिक गहराते जा रहे हैं। एक ओर जहां अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का ऐतिहासिक युद्धविराम लागू हुआ है वहीं दूसरी ओर लेबनान में जारी भीषण हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। भारत ने लेबनान में बड़ी संख्या में नागरिकों के हताहत होने की खबरों पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे ‘बेहद चिंताजनक’ करार दिया है और सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने की अपील की है।
शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
भारत न केवल एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में बल्कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (UNIFIL) में एक प्रमुख सैनिक योगदानकर्ता के रूप में भी लेबनान की शांति और स्थिरता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जायसवाल ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना शांति की पहली शर्त है।
युद्ध के इस भीषण दौर में लेबनान में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा दिल्ली के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में लेबनान के विभिन्न हिस्सों में लगभग 1,000 भारतीय नागरिक मौजूद हैं। बेरूत स्थित भारतीय दूतावास लगातार इन नागरिकों के संपर्क में है। सुरक्षा स्थितियों पर पल-पल की नजर रखी जा रही है ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा पेंच इजरायल का रुख है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी दबाव के बाद ईरान पर हमले रोकने का समर्थन तो किया है लेकिन उन्होंने एक बड़ी शर्त रख दी है। नेतन्याहू के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ हुआ यह अस्थायी समझौता लेबनान में जारी उनके सैन्य अभियानों पर लागू नहीं होता।
युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया। इजरायली सेना (IDF) ने दावा किया कि उसने मात्र 10 मिनट के भीतर हिजबुल्लाह के 100 सामरिक लक्ष्यों को निशाना बनाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया है। इजरायल डिफेंस फोर्स का कहना है कि भले ही ईरान के खिलाफ अभियान रुक गया हो लेकिन लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ ‘लक्षित जमीनी कार्रवाई’ जारी रहेगी।
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भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अज़ार ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरान की सैन्य क्षमताएं हालिया संघर्षों में काफी कमजोर हुई हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि हिजबुल्लाह का खतरा अभी टला नहीं है और अपनी सुरक्षा के लिए इजरायल हर मोर्चे पर कार्रवाई जारी रखेगा। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान को सीजफायर से बाहर रखने का इजरायल का फैसला इस क्षेत्र में एक नए मानवीय संकट को जन्म दे सकता है।