US एयरपोर्ट्स पर ICE अधिकारी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
ICE Agents Deployed US Airports: अमेरिका में जारी आंशिक सरकारी शटडाउन ने देश के हवाई यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को एक गंभीर संकट में डाल दिया है। इस संकट से निपटने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका के 14 प्रमुख हवाई अड्डों पर इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के एजेंटों को तैनात करने का आदेश दिया है। यह तैनाती उन हवाई अड्डों पर की गई है जहां सुरक्षा जांच की लंबी कतारें यात्रियों के लिए मुसीबत बनी हुई हैं।
हवाई अड्डों पर यह स्थिति इसलिए पैदा हुई है क्योंकि डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के तहत आने वाले ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (TSA) के लगभग 50,000 अधिकारियों को 14 फरवरी से वेतन नहीं मिला है। वेतन न मिलने के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी काम पर नहीं आ रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रविवार को लगभग 12% TSA अधिकारी (करीब 3,450 कर्मी) ड्यूटी पर नहीं पहुंचे जो शटडाउन शुरू होने के बाद से अनुपस्थिति की सबसे ऊंची दर है। कई कर्मचारी अपने परिवार का पेट पालने के लिए दूसरी नौकरियां करने को मजबूर हैं।
हालांकि प्रशासन ने आधिकारिक सूची जारी नहीं की है लेकिन एसोसिएटेड प्रेस और सीएनएन की रिपोर्टों के अनुसार, निम्नलिखित प्रमुख हवाई अड्डों पर ICE एजेंटों को देखा गया है:
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि यदि विपक्षी डेमोक्रेट्स फंडिंग समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करते, तो वे इन ‘देशभक्त ICE एजेंटों’ का उपयोग सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए करेंगे।
इस तैनाती ने यात्रियों और नागरिक अधिकार समूहों के बीच चिंता पैदा कर दी है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ICE एजेंट सुरक्षा स्क्रीनिंग नहीं करेंगे क्योंकि वे इसके लिए प्रशिक्षित नहीं हैं। उनका मुख्य कार्य भीड़ को नियंत्रित करना और प्रशासनिक सहायता प्रदान करना होगा ताकि TSA अधिकारी केवल सुरक्षा जांच पर ध्यान केंद्रित कर सकें। ट्रंप के मुख्य सीमा अधिकारी टॉम होमन ने कहा कि एजेंट निकास द्वारों की निगरानी जैसे काम कर सकते हैं।
इस फैसले का कड़ा विरोध भी हो रहा है। ‘अमेरिकन फेडरेशन ऑफ गवर्नमेंट एम्प्लॉइज’ के अध्यक्ष एवरेट केली ने कहा कि अधिकारियों को वेतन मिलना चाहिए न कि उन्हें बिना प्रशिक्षण वाले सशस्त्र एजेंटों से बदला जाना चाहिए। वहीं, मानवाधिकार समूहों को डर है कि एयरपोर्ट पर आव्रजन अधिकारियों की मौजूदगी से प्रवासी समुदायों में डर का माहौल बनेगा भले ही वे आव्रजन जांच न कर रहे हों।
यह भी पढ़ें:- Iran-US Ceasefire: मोजतबा खामेनेई अमेरिका से बात करने को तैयार, रिपोर्ट में किया गया बड़ा दावा
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब डेमोक्रेट्स ने आव्रजन नीतियों में बदलाव की मांग को लेकर DHS फंडिंग बिल को रोक दिया। यह मांग मिनियापोलिस में एक कार्रवाई के दौरान दो अमेरिकी नागरिकों की मौत के बाद उठी थी। इसी बीच, सीनेट ने मार्कवेन मुलिन को DHS का नया प्रमुख नियुक्त किया है जो डोनाल्ड ट्रंप की सख्त आव्रजन नीतियों के समर्थक माने जाते हैं।