इस छोटे से देश ने ट्रंप को दिखाया ठेंगा, कहा- रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करेंगे, जो करना हो…
US-Russia Tensions: हंगरी ने अमेरिका को झटका देते हुए कहा कि वह रूस से तेल और गैस लेना बंद नहीं करेगा। विदेश मंत्री पीटर सिज्जार्टो ने इसे व्यावहारिक मुद्दा बताया। हंगरी में शामिल है।
- Written By: अक्षय साहू
रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा हंगरी (फोटो- सोशल मीडिया)
Hungary Refuses to Stop Buying Russian Oil: रूस से तेल खरीदने को लेकर हंगरी ने अमेरिका को बड़ा झटका दिया है। हंगरी ने साफ कह दिया है कि वह रूस से तेल और गैस लेना बंद नहीं करेगा। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस अपील के बाद सामने आया जिसमें उन्होंने नाटो देशों से रूसी तेल खरीदने पर रोक लगाने की मांग की थी।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान हंगरी के विदेश मंत्री पीटर सिज्जार्टो ने कहा कि उनके देश की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह व्यावहारिक मुद्दा है, राजनीति नहीं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमारे लिए रूसी तेल और गैस के बिना सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति असंभव है। सपने में यह अच्छा लगता है कि हम कहीं और से खरीद लें, लेकिन जहां बुनियादी ढांचा है, वहीं से खरीद सकते हैं।”
ट्रंप के करीबी है हंगरी के प्रधानमंत्री
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि वे रूस पर बड़े प्रतिबंध तभी लगाएंगे जब सभी नाटो देश इस पर सहमत हों और रूस से तेल लेना बंद करें। उनका मानना है कि रूस की आय रोकने के लिए यूरोप को रूसी ऊर्जा छोड़नी होगी। लेकिन हंगरी जैसे देश इसके लिए तैयार नहीं हैं।
सम्बंधित ख़बरें
ईरान पर एयर स्ट्राइक की तैयारी में ट्रंप? US मीडिया के दावे से हलचल तेज, अराघची बोले- सब्र का इम्तिहान न लें
US Iran Tension: ट्रंप की पोस्ट से युद्ध की आशंका! ‘तूफान से पहले की शांति’ लिखकर शेयर की वॉरशिप की तस्वीरें
ट्रंप के जाते ही पुतिन की एंट्री! 19 मई को बीजिंग में सजेगा ‘दो दोस्तों’ का दरबार; आखिर क्या है मुद्दा?
ISIS Leader Killed: ट्रंप का ऐलान, नाइजीरिया में ढेर हुआ ISIS का दूसरा सबसे बड़ा आतंकी अल-मिनुकी
हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान यूरोप में रूस के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। वे अक्सर ट्रंप की तारीफ करते हैं और यूक्रेन की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। यही वजह है कि हंगरी यूरोपीय संघ (EU) के फैसलों में अक्सर अलग रुख अपनाता है।
भारत से नजरिए से बड़ा कदम
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय संघ पाइपलाइन से आने वाले तेल पर नए प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है। खास बात यह है कि ये प्रतिबंध बिना सभी देशों की सहमति के भी लागू किए जा सकते हैं। ऐसे कदम से हंगरी पर दबाव बढ़ सकता है।
यह भी पढ़ें: बांग्लादेश में फिर भड़की चिंगारी, पुलिस हिरासत में हसीना के नेता की मौत, यूनुस पर बरसी अवामी लीग
हंगरी का यह कदम भारत के नजरिए से भी अहम है। भारत ने भी रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान पश्चिमी दबाव को नजरअंदाज कर रूस से सस्ते दाम पर तेल खरीदना जारी रखा। इसके चलते डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ लगाया था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका हंगरी के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है या नहीं।
