सांकेतिक एआई फोटो
How Israel Tracked Khamenei Movements: आधुनिक युद्ध अब केवल मिसाइलों और टैंकों तक सीमित नहीं रह गया है अब ‘निगरानी कैमरे’ भी मौत का पैगाम लाने वाले हथियार बन चुके हैं। हालिया रिपोर्ट्स से यह साफ हो चुका है कि इजरायल ने ईरान के ही निगरानी कैमरों को हैक करके अली खामेनेई की सटीक लोकेशन ट्रैक की और उन्हें निशाना बनाया। तेहरान में लगे इन कैमरों के जरिए खामेनेई की हर गतिविधि उनके आने-जाने के रास्ते और सुरक्षा काफिले की पल-पल की जानकारी जुटाई गई।
ईरान अपनी सुरक्षा और विरोध प्रदर्शनों पर नजर रखने के लिए हजारों कैमरों का इस्तेमाल करता है जिनमें से अधिकतर चीनी कंपनियों के हैं। ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण उसे अत्याधुनिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर मिलने में भारी दिक्कत होती है। इसका परिणाम यह है कि ईरान या तो पुराने सॉफ्टवेयर वाले चीनी डिवाइसेज का इस्तेमाल करता है या फिर पायरेटेड सॉफ्टवेयर पर निर्भर रहता है जो हैकिंग के लिए बेहद आसान शिकार बन जाते हैं।
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, इजरायल ने तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को काफी पहले ही हैक कर लिया था और उनका डेटा सीधे अपने सर्वर पर भेज रहा था। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से इस विशाल डेटा का विश्लेषण किया गया, जिससे यह पता लगाना आसान हो गया कि कौन सा नेता कब और किस रास्ते से गुजरता है। कई कैमरों की सुरक्षा इतनी कमजोर थी कि उनके पासवर्ड ‘1234’ जैसे आसान थे या उन्हें कभी अपडेट ही नहीं किया गया था।
ईरान में कैमरों की हैकिंग का सिलसिला नया नहीं है। 2021 से ही तेहरान के कैमरे कई बार हैक हो चुके हैं और 2022 में एक ग्रुप ने 5000 से ज्यादा कैमरों का डेटा लीक कर दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि अब दुनिया भर में लगे लगभग 1 अरब कैमरे सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
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केवल ईरान ही नहीं, हमास ने भी इजरायल के कैमरे हैक किए थे और रूस-यूक्रेन युद्ध में भी कैमरों का इस्तेमाल जासूसी के लिए देखा गया है। आज की स्थिति यह है कि दुनिया भर में करीब 30 लाख कैमरे बिना किसी सुरक्षा के इंटरनेट से जुड़े हैं, जिनमें से लगभग 2000 अकेले ईरान में हैं। यह कमजोर कड़ी किसी भी देश के लिए काल बन सकती है।