

Highlights:
मिडटर्म चुनाव में हार के बाद भी ट्रंप के पास वीटो का अधिकार बरकरार।
अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद-1 के तहत राष्ट्रपति किसी विधेयक को रोक सकते हैं।
ट्रंप का वीटो पलटने के लिए डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए।
Donald Trump Veto Power: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इस नतीजे को ट्रंप की नीतियों के खिलाफ अमेरिकी जनता के जनादेश के तौर पर देखा जा रहा है। ईरान के साथ युद्ध, महंगाई और ट्रंप के कामकाज को लेकर लोगों में नाराजगी चुनाव में दिखाई दी।
खास बात यह है कि जिन इलाकों में दो साल पहले ट्रंप को भारी समर्थन मिला था, वहां भी डेमोक्रेट्स ने शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि, संसद में बहुमत गंवाने के बावजूद ट्रंप के पास एक ऐसी संवैधानिक ताकत है, जिससे वह विपक्ष के कई फैसलों को रोक सकते हैं। इसे राष्ट्रपति का वीटो अधिकार कहा जाता है। चुनावी नतीजों के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक लाल टोपी की तस्वीर साझा की, जिस पर सिर्फ 'वीटो' लिखा था।
अमेरिका में कानून बनाने का अधिकार कांग्रेस यानी संसद के पास है। कांग्रेस के दो सदन हैं- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट। दोनों सदनों से कोई विधेयक पास होने के बाद राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है।
अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद-1 की धारा-7 के तहत राष्ट्रपति को किसी विधेयक पर वीटो लगाने का अधिकार मिला हुआ है। यानी अगर राष्ट्रपति को लगता है कि कोई विधेयक देश के हित में नहीं है, तो वह उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर सकता है और अपनी आपत्तियों के साथ उसे वापस संसद में भेज सकता है।
इस तरह राष्ट्रपति किसी कानून को लागू होने से रोक सकता है। यही वजह है कि संसद में बहुमत गंवाने के बाद भी ट्रंप के पास डेमोक्रेट्स के लिए मुश्किलें खड़ी करने का विकल्प मौजूद है।
अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति के वीटो को पलटने का भी प्रावधान है। इसके लिए कांग्रेस के दोनों सदनों में दोबारा विधेयक को दो-तिहाई बहुमत से पास कराना होगा। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इसके लिए 435 में से कम से कम 290 सदस्यों और सीनेट में 100 में से कम से कम 67 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। डेमोक्रेट्स के पास दोनों सदनों में बहुमत तो है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत नहीं है।
ऐसे में ट्रंप के वीटो को पलटने के लिए उन्हें रिपब्लिकन सांसदों के समर्थन की भी जरूरत पड़ेगी। यानी चुनाव में जीत के बावजूद डेमोक्रेट्स के सामने बड़ी चुनौती है। संसद में बहुमत मिलने से वे ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर अंकुश लगाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन राष्ट्रपति के वीटो अधिकार के कारण हर विधेयक को कानून बनवाना आसान नहीं होगा।