अमेरिका-कनाडा पहली पसंद, बढ़ते माइग्रेशन पर सरकार का आंकड़ा जारी

Central Government ने राज्यसभा में बताया कि पिछले 13 वर्षों में करीब 18 लाख भारतीयों ने नागरिकता छोड़ी। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूके प्रमुख गंतव्य रहे।
Indian Citizenship
भारतीय नागरिकता (सौ. सोशल मीडिया )
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Rajya Sabha Migration Statistics: पिछले 13 साल में लगभग 18 लाख भारतीय अपने देश की नागरिकता छोड़कर विदेशों में बस गए हैं। यह खुलासा केंद्र सरकार ने संसद में किया है। उच्च सदन राज्यसभा में विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी लिखित जवाब में दी है।

सरकार ने साफ़ किया है कि ज्यादातर नागरिक अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों की नागरिकता ले रहे हैं। साल 2011 से 2018 तक हर साल औसतन 1 से 1.4 लाख लोगों ने विदेशी नागरिकता ली है। साल 2019 में लगभग 1,44,000 लोग विदेशी हो गए। साल 2020 में कोविड महामारी के कारण इसमें कमी आई लेकिन 85,000 लोगों ने भारतीय नागरकिता छोड़ी।

माइग्रेशन के फैसलों पर पड़ रहा सीधा असर

साल 2021 में 1,63,370 और साल 2022 में सबसे ज्यादा 2,25,620 लोग विदेशी निवासी बन गए। इसी तरह साल 2023 में 2,16,219 और वर्ष 2024 में 2,06,378 लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ दी और विदेश में बस गए, सरकार ने अभी वर्ष 2025 का डेटा सार्वजनिक नहीं किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिकों में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने की भावना देखी गई है। लगातार बदलती नीतियों, राजनीतिक विवादों, सत्ता-केंद्रित फैसले लेने की प्रक्रिया और बढ़ते ध्रुवीकरण के कारण, मध्यम वर्ग और युवाओं में अपने भविष्य को लेकर असुरक्षा बढ़ रही है। इसका सीधा असर माइग्रेशन के फैसलों पर पड़ रहा है। इसके साथ ही शिक्षा की गिरती गुणवत्ता, स्वास्थ्य व्यवस्था और रोजगार के घटते मौकों को लेकर शिकायतें भी बढ़ रही है।

नागरिकता छोड़ने के मुख्य कारण

  • अधिक वेतन और नौकरी में स्थिरता
  • ज्यादा शिक्षा और रिसर्च के मौके
  • अच्छी हेल्थ केयर और सामाजिक सुरक्षा
  • जिनका परिवार पहले से ही विदेश में बसा हुआ है
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