सांकेतिक फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Greece Police Accusations Migrants Border Pushbacks: अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर के मुताबिक, बातचीत के दौरान ट्रंप ने मोदी से कहा, हम सभी आपको बहुत पसंद करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते इस समय मजबूत स्थिति में हैं. अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली बातचीत थी.
यूरोपीय देश ग्रीस से मानवाधिकारों के उल्लंघन और सीमा प्रबंधन की एक ऐसी डरावनी तस्वीर सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। ग्रीक पुलिस पर आरोप लगा है कि वह पाकिस्तान, अफगानिस्तान और सीरिया जैसे देशों के प्रवासियों को ‘नकाबपोश मर्सिनरीज’ (किराये के सैनिकों) के रूप में भर्ती कर रही है। इन तथाकथित गुर्गों का उपयोग तुर्की से लगी एवरोस (Evros) भूमि सीमा पर अन्य प्रवासियों को हिंसक तरीके से पीछे धकेलने के लिए किया जा रहा है।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक पुलिस वर्ष 2020 से इस अनैतिक प्रथा का सहारा ले रही है। इन भर्ती किए गए प्रवासियों को इस ‘गंदे काम’ के बदले में नकद राशि, अन्य प्रवासियों से लूटे गए मोबाइल फोन और कुछ मामलों में ऐसे कानूनी दस्तावेज दिए जाते हैं जिनसे वे ग्रीस के भीतर स्वतंत्र रूप से घूम सकें।
पुलिस के आंतरिक दस्तावेजों से यह भी खुलासा हुआ है कि इन समूहों का संचालन और निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों के सीधे आदेशों के तहत की जा रही थी।
एवरोस सीमा क्षेत्र, जो ग्रीस और तुर्की के बीच लगभग 200 किलोमीटर लंबी है अब हिंसा का अड्डा बन गई है। प्रत्यक्षदर्शियों और प्रभावित प्रवासियों ने बताया कि इन ‘मर्सिनरीज’ द्वारा उन्हें निर्वस्त्र कर पीटा जाता है और लूटा जाता है।
पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इन समूहों के जरिए हर सप्ताह सैकड़ों लोगों को जबरन सीमा के पार धकेला जा रहा है। सबसे विचलित करने वाली बात यह है कि कुछ मामलों में महिला प्रवासियों के साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न की शिकायतें भी सामने आई हैं।
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यूरोपीय सीमा एजेंसी ‘फ्रोंटेक्स’ के मौलिक अधिकार कार्यालय ने भी अपनी रिपोर्ट में इन आरोपों की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, 10 से 20 विदेशी नागरिक ग्रीक अधिकारियों के निर्देश पर काम कर रहे थे जो प्रवासियों को डराने, पीटने और उन्हें जबरन वापस भेजने से पहले उनकी यौन तलाशी लेने जैसे दुर्व्यवहार में शामिल थे। कुछ पीड़ितों को तब तक पीटा गया जब तक कि वे बेहोश नहीं हो गए। यह स्थिति यूरोपीय संघ की बाहरी सीमा पर सुरक्षा और मानवता के बीच के संघर्ष को गंभीर रूप से उजागर करती है।