Ghana Rejects US Deal: छोटे से देश घाना ने दिखाई ट्रंप को आंख, डेटा प्राइवेसी के डर से हेल्थ डील को नकारा

Ghana Rejects US Deal: पश्चिम अफ्रीका के छोटे से देश घाना ने डेटा प्राइवेसी चिताओं के कारण अमेरिका का 300 मिलियन डॉलर का प्रस्तावित स्वास्थ्य समझौता ठुकरा दिया है। यह डेटा सुरक्षा का मामला है।
Ghana Rejects US Deal : Ghana Rejects US Health Agreement Over Data Privacy Concerns
घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Ghana Rejects US Deal Over Data Privacy Concerns: पश्चिम अफ्रीकी देश घाना ने डेटा प्राइवेसी को लेकर बहुत बड़ी चिंता जताते हुए अमेरिका के साथ एक अहम स्वास्थ्य समझौते को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। घाना के एक बड़े अधिकारी ने इस बात की पक्की पुष्टि की है कि इस समझौते में डेटा सुरक्षा को लेकर कई बड़ी खामियां मौजूद थी। अमेरिकी संस्थानों को घाना के बेहद संवेदनशील हेल्थ डेटा तक बिना किसी उचित सुरक्षा उपाय के आसानी से सीधी पहुंच मिल सकती थी।

घाना की डेटा प्रोटक्शन कमिशन के अधिकारी आर्नोल्ड कर्वापुओ ने कहा कि इस समझौते में मांगा गया डेटा एक्सेस आवश्यक सीमा से कहीं ज्यादा था। डोनाल्ड ट्रंप शासन की 'अमेरिका फर्स्ट' पॉलिसी के तहत वाशिंगटन में 30 से अधिक अफ्रीकी देशों के साथ इस तरह के कई बड़े स्वास्थ्य समझौते किए हैं। इन समझौतों के जरिए अफ्रीकी देशों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सिस्टम को मजबूत करने के लिए करोड़ों डॉलर की भारी सहायता दी जानी थी।

ट्रंप का नया नियम

अब तक ऐसे स्वास्थ्य समझौते यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) के तहत बहुत ही सुरक्षित तरीके से किए जाते थे। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इस पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करके एक नई व्यवस्था शुरू की है। यह नई व्यवस्था पिछले साल के अंत में शुरू हुई थी जो इससे पहले के सभी पुराने समझौतों की जगह लेने वाली है।

जिंबॉब्वे का इनकार

घाना से पहले इसी साल फरवरी के महीने में अफ्रीकी देश जिंबॉब्वे ने भी इसी तरह की चिताओं के चलते यह प्रस्तावित समझौता ठुकराया था। जिंबॉब्वे ने भी प्रस्तावित समझौते में डेटा सुरक्षा नियमों पर गहरी आपत्ति और असहमति साफ तौर पर जताई थी। इसके अलावा जाम्बिया ने भी अपने स्वास्थ्य समझौते में कुछ कड़े प्रावधानों पर बहुत गंभीर सवाल खड़े किए थे।

घाना को भारी फंडिंग

करीब 300 मिलियन डॉलर के इस बड़े प्रस्तावित समझौते के तहत घाना को 5 वर्षों में लगभग 109 मिलियन डॉलर की भारी फंडिंग मिलने वाली थी। लेकिन घाना प्रशासन को इस बात का डर था कि इसके तहत संवेदनशील हेल्थ डेटा से नागरिकों की पहचान उजागर हो सकती थी। यह देश के महत्वपूर्ण हेल्थ डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को सीधे किसी भी विदेशी संस्था को सौंपने जैसा खतरनाक कदम होता।

इस समझौते में केवल हेल्थ डेटा ही नहीं बल्कि मेटा डेटा, डैशबोर्ड, रिर्पोटिंग टूल्स और डेटा डिक्शनरी तक अमेरिकी पहुंच शामिल की गई थी। इसके अलावा इस प्रस्ताव के तहत 10 तक अमेरिकी संस्थानों को बिना किसी पूर्व अनुमति के इन महत्वपूर्ण डेटा तक सीधी पहुंच मिल सकती थी। इस व्यवस्था में घाना के पास अपने ही डेटा के उपयोग पर कोई भी वास्तविक नियंत्रण नहीं रह जाता।

अमेरिका का जवाब

घाना ने अमेरिका के इस खराब प्रस्ताव को अस्वीकार करने का अपना पक्का निर्णय बता दिया है और सही समझौते की मांग की है। इस मामले पर अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि वे द्विपक्षीय वार्ताओं के गुप्त विवरण कभी भी सार्वजनिक नहीं करते हैं। अमेरिका दोनों देशों के बीच भविष्य में भी साझेदारी को मजबूत करने के नए रास्ते लगातार तलास्ता रहेगा।

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