ग्रीनलैंड के लिए अमेरिका, चीन और रूस के बीच छिड़ा महायुद्ध, जानिए क्यों खास है यह बर्फीला द्वीप
Geopolitical Arctic Battle: ग्रीनलैंड पर अमेरिका, रूस और चीन के बीच वर्चस्व की जंग छिड़ी है। इसके खनिज और समुद्री मार्ग इसे दुनिया की महाशक्तियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक केंद्र बनाते हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
जानें ग्रीनलैंड पर अमेरिका, चीन और रूस की नजर क्यों? (सोर्स-सोशल मीडिया)
Strategic importance of Greenland island: ग्रीनलैंड के रणनीतिक महत्व के कारण यह दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप आज वैश्विक राजनीति का मुख्य केंद्र बन गया है। अमेरिका, रूस और चीन जैसी महाशक्तियां इस बर्फीले क्षेत्र पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिए एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ी हैं। फिलहाल ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का नियंत्रण है, लेकिन इसकी रक्षा और विदेश नीति को लेकर भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव बना हुआ है। इसकी भौगोलिक स्थिति और भविष्य के छिपे हुए संसाधनों ने दुनिया की सबसे बड़ी ताकतों के बीच तनातनी को बढ़ा दिया है।
रणनीतिक स्थिति और व्यापार
ग्रीनलैंड उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक महासागर के बीच स्थित है और इसकी एकमात्र सीमा कनाडा से सटी हुई है। भौगोलिक रूप से यह उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है और इसकी आबादी मात्र 56 हजार के करीब है। इसके पास आंतरिक प्रशासन की आजादी तो है, लेकिन इसकी सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी डेनमार्क सरकार के पास है।
ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने की वजह से अब यहां नए आर्कटिक समुद्री मार्ग भविष्य के लिए तैयार हो रहे हैं। ये नए शिपिंग रूट एशिया, यूरोप और अमेरिका के बीच की व्यापारिक दूरी और समय को बहुत कम कर सकते हैं। जिस भी देश का इन व्यापारिक रूटों पर नियंत्रण होगा, वह भविष्य के वैश्विक व्यापार का नया राजा बन जाएगा।
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सैन्य शक्ति और वर्चस्व
अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां उसका थुले एयर बेस स्थित है। यह एयर बेस मिसाइल चेतावनी सिस्टम और अंतरिक्ष की निगरानी के लिए अमेरिका के लिए बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। हाल के समय में रूस और चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अमेरिका की चिंता को और अधिक बढ़ा दिया है।
रूस इस आर्कटिक क्षेत्र को अपने प्रभाव वाला इलाका मानता है और वह अमेरिका की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखता है। दूसरी ओर, चीन खुद को आर्कटिक के करीब वाला राज्य बताकर यहां निवेश के जरिए अपने पैर जमाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका किसी भी कीमत पर ग्रीनलैंड में चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को रोकने की पूरी कोशिश कर रहा है।
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खनिजों का विशाल भंडार
ग्रीनलैंड की बर्फ के नीचे रेयर अर्थ मिनरल्स, यूरेनियम, जिंक और आयरन ओर जैसे बेशकीमती खनिजों का खजाना छिपा हुआ है। ये खनिज आधुनिक तकनीक जैसे इलेक्ट्रिक गाड़ियों, सेमीकंडक्टर और हाई-टेक डिफेंस इंडस्ट्री के निर्माण के लिए बहुत जरूरी हैं। वर्तमान में चीन इन खनिजों की वैश्विक सप्लाई चेन पर हावी है, जिसे अमेरिका चुनौती देना चाहता है।
अमेरिका के पास चीन से आगे निकलने के लिए ग्रीनलैंड के इन संसाधनों पर नियंत्रण पाना सबसे अच्छा विकल्प है। यहां तेल और गैस के भंडार भी मौजूद हो सकते हैं जो किसी बड़े आर्थिक खजाने से कम नहीं माने जाते। ग्रीनलैंड के बिना डेनमार्क भी आर्कटिक क्षेत्र की राजनीति से लगभग पूरी तरह बाहर हो जाएगा, इसलिए वह भी मजबूती से खड़ा है।
Frequently Asked Questions
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Que: ग्रीनलैंड पर वर्तमान में किस देश का प्रशासनिक और राजनैतिक नियंत्रण है?
Ans: ग्रीनलैंड पर वर्तमान में डेनमार्क का नियंत्रण है, जो इसकी रक्षा और विदेश नीति की पूरी जिम्मेदारी संभालता है।
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Que: ग्रीनलैंड की कुल जनसंख्या कितनी है और यह भौगोलिक रूप से कहां स्थित है?
Ans: ग्रीनलैंड की कुल जनसंख्या लगभग 56 हजार है और यह उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक महासागर के बीच स्थित दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है।
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Que: अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड का थुले एयर बेस क्यों महत्वपूर्ण है?
Ans: थुले एयर बेस अमेरिका के लिए मिसाइल चेतावनी सिस्टम और स्पेस सर्विलांस के लिए बेहद अहम भूमिका निभाता है।
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Que: ग्रीनलैंड में कौन से प्रमुख खनिज पाए जाते हैं जो भविष्य की तकनीक के लिए जरूरी हैं?
Ans: यहां रेयर अर्थ मिनरल्स, यूरेनियम, जिंक, आयरन ओर और तेल-गैस के संभावित भंडार मौजूद हैं जो इलेक्ट्रिक गाड़ियों और सेमीकंडक्टर के लिए जरूरी हैं।
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Que: आर्कटिक के पिघलते ग्लेशियर वैश्विक व्यापार को किस प्रकार प्रभावित कर सकते हैं?
Ans: ग्लेशियर पिघलने से नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं, जो एशिया, यूरोप और अमेरिका के बीच व्यापारिक दूरी और समय को काफी कम कर देंगे।
