
ईरान में छात्रों का प्रदर्शन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Student Protest in Iran: ईरान में लगभग एक सप्ताह पहले शुरू हुए विरोध प्रदर्शन नए साल के साथ और भी हिंसक हो गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान कम से कम छह लोग मारे गए हैं। ये प्रदर्शन ईरान के विभिन्न हिस्सों में फैल गए हैं और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में बदल गए हैं। कई मानवाधिकार समूहों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच संघर्ष अब पूरे देश में फैल चुका है।
साल 2026 के पहले दिन जब नए साल की शुरुआत हुई, प्रदर्शनकारियों ने शांति व्यवस्था को बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन शुरू किए। इस दौरान तेहरान के पश्चिमी इलाकों में अधिकारियों ने 30 लोगों को गिरफ्तार किया। यह प्रदर्शन ईरान के लोरेस्तान, इस्फहान और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमुख रूप से फैल गए। इनमें से सबसे ज्यादा हिंसा लोरेस्तान के अजना शहर में हुई, जहां सड़कों पर जलती हुई चीजें और गोलियों की आवाजें सुनी जा रही थीं।
ईरान में प्रदर्शन की शुरुआत महंगाई और आर्थिक संकट से हुई थी। ईरान में महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे ज्यादा बढ़ी है। दिसंबर 2022 में महंगाई दर 42.5% तक पहुंच गई थी। यही कारण है कि छात्र, खासकर तेहरान विश्वविद्यालय के विद्यार्थी भी सड़कों पर उतर आए और सरकार विरोधी नारे लगाए।
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🇮🇷🔴Iranian sources: Group of rioters brutally attacked a security guard in Hamedan, Iran. pic.twitter.com/7gJCBwKqYr — OSINTNJ (@OSINTNJ) January 2, 2026
जानकारी के मुताबिक, तेहरान विश्वविद्यालय के छात्रों ने दिवंगत शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रजा पहलवी के समर्थन में भी नारे लगाए। रजा पहलवी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मैं आपके साथ हूं। हमारी जीत निश्चित है क्योंकि हमारा मकसद सही है।” इस बयान ने प्रदर्शनकारियों के मनोबल को और बढ़ा दिया है। इन घटनाओं को देखते हुए माना जा रहा है कि जनता दमनकारी सरकार से परेशान हो चुकी है और फिर से राजशाही लाना चाहती है।
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ईरानी धार्मिक नेतृत्व के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने देश की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके अलावा, इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान के राजनीतिक नेतृत्व को कई संकटों का सामना करना पड़ा है, जिसमें 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शन भी शामिल हैं।






