होर्मुज में ईरान के खिलाफ अमेरिका की मदद करेगा फ्रांस! राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बता दिया अपना प्लान

US-Iran War: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के 19वें दिन ड्रोन और मिसाइल हमले जारी हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तनाव का केंद्र बना है; फ्रांस ने सुरक्षा में मदद देने की तैयारी जताई।
France Help US on Strait of Hormuz
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (सोर्स- सोशल मीडिया)
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France Help US on Strait of Hormuz: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के 19वें दिन ड्रोन और मिसाइल हमलों का सिलसिला जारी है। ईरान ने इराक में अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाकर हमला किया, वहीं इजरायल की राजधानी तेल अवीव पर भी ईरानी हमले दर्ज किए गए। इन लगातार हमलों ने ईरान युद्ध को अपने चरम पर ला दिया है। 

वहीं, अमेरिका के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे बड़ी चिंता का केंद्र बन गया है। ईरान इस क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी देशों के जहाजों को टारगेट कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नाटो और अन्य देशों से मदद की अपील की थी। लेकिन फ्रांस को छोड़कर लगभग सभी देशों ने ट्रंप की अपील को ठुकरा दिया है।

होर्मुज को लेकर अमेरिका की मदद करेगा फ्रांस

डोनाल्ड ट्रंप की अपील के जवाब में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि फ्रांस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा में मदद करने को तैयार है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मिशन मध्य पूर्व में जारी युद्ध से अलग होगा। मैक्रों ने कहा, "हम इस जंग में शामिल नहीं हैं, इसलिए फ्रांस होर्मुज को खोलने या मुक्त कराने वाले अभियानों में कभी भाग नहीं लेगा।" उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ बातचीत और तनाव को कम करना जरूरी है, और यह मौजूदा सैन्य अभियान और बमबारी से पूरी तरह अलग होना चाहिए।

नाटो ने ट्रंप की अपील ठुकराई

वहीं, नाटो ने ट्रंप की अपील को ठुकरा दिया है। अमेरिका के भीतर भी असहमति दिखाई दे रही है। अमेरिकी काउंटर टेररिज्म चीफ जो कैंट ने इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका के लिए कभी भी वास्तविक खतरा नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल के दबाव में ट्रंप इस जंग में शामिल हुए और इससे “अमेरिका फर्स्ट” नीति को बड़ा झटका लगा है।

नाटो की मदद न मिलने के बाद डोनाल्ड ट्रंप नाराज हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अब नाटो की जरूरत नहीं है और यह निराशाजनक है कि अमेरिका अरबों डॉलर दूसरों की सुरक्षा में खर्च करता है, लेकिन जरूरत के समय सहयोगी साथ नहीं देते। उन्होंने नाटो के एकतरफा व्यवस्था करार दिया। नाटो के अलावा अमेरिका के करीबी सहयोगी देश ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया ने भी अमेरिका के सैन्य अभियान के प्रस्ताव को खाजिर कर दिया। 

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