सालों बाद फिर चर्चा में आया इराक...पूर्व राष्ट्रपति को UN में मिली बड़ी जिम्मेदारी, करेंगे ये काम

Refugee Crisis: इराक के पूर्व राष्ट्रपति बरहम सालेह को संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है। उनका अनुभव शरणार्थियों के प्रति संवेदनशीलता और व्यावहारिक नेतृत्व में मदद करेगा।
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इराक के पूर्व राष्ट्रपति बरहम सालेह (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Barham Salih Elected UN Refugee Agency Head: इराक के पूर्व राष्ट्रपति बरहम सालेह को संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है। यह पद उन्हें तब सौंपा गया है, जब शरणार्थियों के मुद्दे को लेकर शरणार्थी एजेंसी को दो गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, धन की कमी और मदद की बढ़ती मांग। सालेह को इस पद से लिए सबसे योग्य उम्मीदवार माना जा रहा है। क्योंकि एक समय में वो खुद शरणार्थी रह चुके हैं। 

19 दिसंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की सिफारिश पर सालेह को सर्वसम्मति से इस पद पर नियुक्त किया। इस मौके पर सालेह का कहा कि, "एक पूर्व शरणार्थी के तौर पर मैं जानता हूं कि सुरक्षा और अवसर किसी के जीवन को कैसे बदल सकते हैं।" उनका यह अनुभव उन्हें शरणार्थियों के प्रति संवेदनशील और व्यावहारिक सोच के साथ नेतृत्व करने में मदद करेगा।

फिलिपो ग्रांडी की जगह लेंगे सालेह

सालेह इटली के फिलिपो ग्रांडी की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल इस साल के अंत में समाप्त हो रहा है। ग्रांडी ने सालेह का स्वागत करते हुए कहा कि उनका अनुभव उन्हें इस कठिन समय में शरणार्थी एजेंसी का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त बनाता है। एंटोनियो गुटेरेस भी पहले शरणार्थियों से जुड़े इस पद पर रह चुके हैं। अब तक इस पद पर अधिकतर यूरोप के लोग रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में 117 मिलियन से अधिक शरणार्थी हैं, जिनमें अधिकांश विकासशील देशों में रह रहे हैं। एजेंसी 128 देशों में काम करती है और इसके 14,600 कर्मचारी हैं।

2018 में बने थे इराक के राष्ट्रपति

बरहम सालेह 2018 से 2022 तक इराक के राष्ट्रपति रहे और 2009 से 2012 तक कुर्दिस्तान क्षेत्रीय प्रधानमंत्री भी रहे। 1979 में सद्दाम हुसैन के शासनकाल में शरणार्थी बनने से पहले वो ब्रिटेन में शिक्षा प्राप्त करने गए थे।

शरणार्थियों को लेकर गंभीर चुनौती

इस साल की शुरुआत में एक रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई थी कि शरणार्थियों के सामने कई गंभीर समस्याएं हैं, जैसे विस्थापन का बढ़ना और धन की कमी। रिपोर्ट के अनुसार, 1.4 बिलियन डॉलर की योजनाएं धन की कमी के कारण बंद कर दी गईं हैं, जिससे लगभग 11.6 मिलियन शरणार्थियों को सहायता से वंचित होने का खतरा है।

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