

Flydubai Boeing 737 MAX Nosedive Incident: बीते सप्ताह फ्लाईदुबई की फ्लाइट के टेक ऑफ के दो घंटे बाद कुछ हिंसक घटनाओं की वजह से बोइंग 737 मैक्सजेट में इतनी स्पीड और ग्रेविटेशनल फोर्स आ गई कि छोटे प्लेन भी इसके संपर्क में आकर टुकड़े-टुकड़े हो सकते थे। हालांकि ऐसा नहीं हुआ।
इसके बजाय लगभग चार साल पुराने फ्लाइट का दो पायलटों ने नियंत्रण में लेते हुए उसके ऑपरेशन का कंट्रोल संभाल लिया। वे इस पुराने एयरक्राफ्ट को एक घंटे से ज्यादा समय तक उड़ाते रहे और टेल पर डैमेज कंपोनेंट होने के बावजूद सुरक्षित लैंड कर पाए।
172 यात्रियों और क्रू के साथ फ्लाइट 1073 के पायलटों ने स्थानीय समयानुसार सुबह 7:03 बजे दुबई एयरपोर्ट के गेट से रनवे पर पहुंचा और टेक ऑफ किया और कुछ मिनट बाद उसे हवा में ऊपर उठाना शुरू कर दिया। फ्लाईदुबई का यह एयरक्राफ्ट नोजडाइव हादसा झेलने के लिए तैयार नहीं था।
कैप्टन स्मित मच्छार पर उसके फर्स्ट ऑफिसर अल-हम्मामी के हमला करते ही प्लेन नीचे गिरने लगा। तेजी से नीचे उतरते समय प्लेन पर ऐसा दबाव पड़ा, जिसे झेलने के लिए उसे डिजाइन नहीं किया गया था। इस कारण उसे नुकसान पहुंचा। पैसेंजर कॉकपिट में पहुंचे और प्लेन को नियंत्रण में ले लिया। इसके साथ कुछ मिनट बाद प्लेन की नीचे उतरने की रफ्तार धीमी हो गई।
अक्सर नोजडाइव हादसा तब देखा जाता है जब फ्लाइट में कोई तकनीकी गड़बड़ी या अचानक फ्यूल खत्म हो जाता है। हालांकि, इसमें फ्लाइट अपने नोज के बल जमीन से आकर टकराता है और फ्लाइट का अलग पूरा हिस्सा जमीन में घुस जाता है। लेकिन ये एंगल पर निर्भर करता है कि ये किस पोजिशन में नोजडाइव हुआ है।
अगर 30 या 40 डिग्री के आसपास नोजडाइव हो रहा है तो कॉकपिट मौजूद लोगों को जान का खतरा होता है लेकिन बाकी यात्रियों की जान को बचाया जा सकता है। अगर ये एंगल 60 से 90 डिग्री के बीच होता है तो फिर किसी का भी बचना मुश्किल होता है।
फ्लाइट नोजडाइव: फ्लाईदुबई फ्लाइट का शीर्ष झुकाव 39 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि एक मानक झुकाव 3 डिग्री एंगल होता है।
हॉरिजेंटल टेल: ऊपर-नीचे होने वाली हरकतों को कंट्रोल करता है। यह पंखों से आने वाली अजीब कंपन के संपर्क में आया।
ऐलेरॉन: एयरक्राफ्ट को घुमाने और धीमा करने के लिए इस्तेमाल आने वाले हिज पैनल। शॉकवेव और हवा से तेजी से हिलते हैं।
रडर: यह बाएं और दाएं मूवमेंट को कंट्रोल करता है। इस स्पीड पर यह बहुत तेजी से फड़फड़ा सकता है और टूट सकता है।
विंग: विंग की सतह पर शॉकवेव बन सकती हैं और साउंड बैरियर को पार करते समय सोनिक बूम पैदा करती है।
ऊपर दिया गया ब्योरा दिखाता है कि बोइंग 737 मैक्स पर कितना दबाव पड़ा, जो फ्लाइटरडार 24 से सेकंड-दर-सेकंड सैटेलाइट ट्रैकिंग डेटा पर आधारित है। उम्मीद है कि 737 मैक्स की पूरी जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे किस तरह का नुकसान हुआ है और जिसे ठीक किया जा सकता है या नहीं।
हालांकि नासा और यूएस एयर फोर्स के साथ फ्लाइट प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले एम्ब्री-रिडल एरोनॉटिकल यूनिवर्सिटी के एयरोडायनामिकिस्ट टोनी फरीना कहते हैं, 'मुझे पक्का नहीं है कि इसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा। रकम से कम इसकी पूरी और अच्छी तरह से जांच की जरूरत होगी।'