

फ्लावियो बोल्सोनारो की चिट्ठी में खुद को निर्वाचित राष्ट्रपति बताया गया था
सहयोगियों ने पुराने ड्राफ्ट का कंटेंट शामिल होने के लिए ChatGPT को जिम्मेदार ठहराया
संशोधित चिट्ठी में निर्वाचित राष्ट्रपति की जगह नेता शब्द इस्तेमाल हुआ
Flavio Bolsonaro ChatGPT Controversy: ब्राजील के विपक्षी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो लगातार विवादों में घिरते जा रहे हैं। हाल ही में राष्ट्रपति चुनाव में हारने के बावजूद उन्होंने एक चिट्ठी लिखकर खुद को देश का असली नेता बताया था। अब इसी दावे को लेकर बोल्सोनारो एक ताजा विवाद में घिर गए हैं। उनके सहयोगियों ने इसे एक तकनीकी गलती बताया और इसके लिए ChatGPT को जिम्मेदार ठहराया है।
सहयोगी का दावा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल ने गलती से चिट्ठी में पुराने ड्राफ्ट का कंटेंट शामिल कर दिया था। हालांकि, इस सफाई के बावजूद फ्लावियो बोल्सोनारो अब भी चुनावी नतीजों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।
फ्लावियो बोल्सोनारो की ओर से हाल ही में जारी एक चिट्ठी में उन्हें ब्राजील का असली 'निर्वाचित राष्ट्रपति' बताया गया था। इस चिट्ठी के सोशल मीडिया पर पोस्ट होने के लगभग एक घंटे बाद ही इसे हटा लिया गया। इसके बाद संशोधित चिट्ठी जारी की गई, जिसमें 'निर्वाचित राष्ट्रपति' की जगह 'ब्राजील का नेता' शब्द का इस्तेमाल किया गया।
ब्राजील में रविवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में फ्लावियो बोल्सोनारो को वामपंथी नेता और राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव में दोनों उम्मीदवारों के बीच 40 लाख से ज्यादा वोटों का अंतर रहा था।
इसके बावजूद बुधवार को फ्लावियो बोल्सोनारो ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए खुद को देश का वास्तविक 'निर्वाचित राष्ट्रपति' बताया था। हालांकि, अपने इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया।
फ्लावियो बोल्सोनारो के करीबी सहयोगी पाउलो फिगुएरेडो ने इस पूरे मामले पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि चिट्ठी तैयार करने के दौरान कई बार बदलाव किए गए थे। इसमें अलग-अलग लोगों ने अपने सुझाव भी दिए थे। फ्लावियो के छोटे भाई और पूर्व सांसद एडुआर्डो बोल्सोनारो ने दस्तावेज का अंतिम प्रारूप तैयार करने के लिए ChatGPT की मदद ली थी।
फिगुएरेडो के मुताबिक, इसी दौरान ChatGPT ने गलती से पुराने ड्राफ्ट का टेक्स्ट अंतिम दस्तावेज में शामिल कर दिया। इसके अलावा चिट्ठी में ब्राजील के राष्ट्रीय प्रतीक का पुराना डिजाइन भी इस्तेमाल हो गया था।
पाउलो फिगुएरेडो ने बताया कि फ्लावियो ने कानूनी और नैतिक वजहों को ध्यान में रखते हुए चिट्ठी में 'निर्वाचित राष्ट्रपति' के बजाय 'नेता' शब्द रखने का फैसला किया था। उन्होंने इस पूरे विवाद को ज्यादा गंभीर नहीं बताया और कहा कि इस गलती से जुड़े लोगों को यह घटनाक्रम मजेदार लगा। इस मामले को लेकर OpenAI और फ्लावियो बोल्सोनारो के प्रेस अधिकारियों से भी प्रतिक्रिया मांगी गई थी, लेकिन तत्काल कोई जवाब नहीं मिला।
चिट्ठी में बदलाव किए जाने के बावजूद फ्लावियो बोल्सोनारो के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। फिगुएरेडो ने स्पष्ट किया कि फ्लावियो अब भी चुनाव परिणाम को अवैध मानते हैं और उसे स्वीकार नहीं करते।
उनका कहना है कि फ्लावियो ब्राजील में लोकतंत्र की बहाली के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। यानी चिट्ठी से 'निर्वाचित राष्ट्रपति' शब्द भले ही हटा दिया गया हो, लेकिन चुनावी नतीजों को लेकर उनका विरोध अब भी बरकरार है।
फ्लावियो बोल्सोनारो के सामने सिर्फ राजनीतिक ही नहीं, बल्कि कानूनी चुनौतियां भी खड़ी हो रही हैं। वह बुधवार को ब्राजील छोड़कर अमेरिका के मियामी पहुंच गए थे। बताया गया कि कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया था, लेकिन उन्होंने इस आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया। हालांकि, फ्लावियो ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है।