मैड मैन थ्योरी के जरिए ईरान युद्ध जीतना चाहते थे ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया)
US Madman Theory: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया ईरान युद्ध के दौरान जिस आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया, उस पर व्यापक आलोचना हुई। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने को लेकर दी गई उनकी कड़ी चेतावनियों और “ईरानी सभ्यता को मिटा देने” जैसे बयानों ने कई सवाल खड़े किए। हालांकि अब सामने आ रही रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सब अमेरिका की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसे “मैडमैन थ्योरी” (Madman Theory) कहा जाता है।
यह रणनीति अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन से जुड़ी मानी जाती है। वियतनाम युद्ध के दौरान निक्सन चाहते थे कि उनके दुश्मन यह मान लें कि वे किसी भी हद तक जा सकते हैं यहां तक की परमाणु हमले भी कर सकते हैं। उन्होंने अपने सहयोगियों को निर्देश दिया था कि विरोधियों के बीच उनकी एक “अनिश्चित” और “कुछ हद तक पागल” छवि बनाई जाए, ताकि डर और भ्रम पैदा हो और दुश्मन समझौते के लिए मजबूर हो जाए।
मैडमैन थ्योरी (Madman Theory) अंतरराष्ट्रीय राजनीति की एक रणनीति है, जिसमें कोई नेता खुद को अस्थिर, गुस्सैल या अप्रत्याशित दिखाता है। इसका उद्देश्य विरोधी पक्ष को यह विश्वास दिलाना होता है कि वह किसी भी चरम कदम तक जा सकता है। जब सामने वाला पक्ष नेता के व्यवहार का अनुमान नहीं लगा पाता, तो वह जोखिम लेने से बचता है और अक्सर समझौते की ओर झुक जाता है।
ईरान के साथ टकराव के दौरान ट्रंप का रवैया इसी रणनीति से मेल खाता दिखा। उन्होंने एक ओर ईरान को “पाषाण युग में भेजने” और बड़े हमलों की धमकी दी, वहीं कुछ ही समय बाद सीजफायर पर सहमति भी जता दी। उनके बयान लगातार बदलते रहे कभी सख्त चेतावनी, तो कभी बातचीत का प्रस्ताव।
इस तरह के विरोधाभासी और आक्रामक बयानों ने ट्रंप की छवि एक अप्रत्याशित नेता के रूप में पेश की, जो मैडमैन थ्योरी का मुख्य तत्व है। इसे “गुड कॉप, बैड कॉप” रणनीति से भी जोड़ा जाता है, जहां एक ही नेता अलग-अलग भूमिकाएं निभाकर दबाव बनाता है।
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ट्रंप के बयान भले ही विवादित रहे हों, लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक यह एक रणनीतिक तरीका भी हो सकता है जिसका मकसद विरोधी को भ्रमित करना और बातचीत की मेज पर झुकने के लिए मजबूर करना है।