

इजरायल में पूरे देश को एक ही राष्ट्रीय निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है
नेसेट की 120 सीटों पर आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से चुनाव होता है
सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए
Israel Elections 2026: मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक चले संघर्ष के बाद अब इजरायल में राष्ट्रीय चुनाव होने वाले हैं। कल यानी 27 अक्टूबर को मतदान होने जा रहे हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद गाजा, लेबनान और ईरान के साथ करीब तीन साल तक चले युद्ध के बीच अब इजराइली जनता नई सरकार चुनने के लिए वोट करने वाली है। यह चुनाव कई मायनों में अहम है क्योंकि यह न सिर्फ वर्तमान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य तय करेगी, बल्कि इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष की दिशा और दशा दोनों तय करेगी। ऐसे में आइए समझते हैं कि भारत और इजरायल की चुनाव प्रणालियों में क्या प्रमुख अंतर हैं।
इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर सत्ता में बने रहने के लिए प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, इस बार उनकी राह आसान नहीं मानी जा रही है। क्योंकि गाजा और उसके आसपास जारी संघर्ष को लेकर न सिर्फ फिलिस्तीनियों में बल्कि इजरायली नागरिक भी कई बार संघर्ष को लेकर अपनी नाराजगी जता चुके हैं।
चुनाव में नेतन्याहू का सीधा मुकाबला पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाली 'यशार' पार्टी से है। जिन्हें मतदाताओं से अच्छे समर्थन मिलने की बात सामने आ रही है। नेतन्याहू की 'लिकुड' पार्टी और उनके विरोधियों के बीच कड़ा मुकाबला होने के कारण चुनाव के नतीजों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
इजरायल की चुनाव प्रणाली भारत समेत कई अन्य लोकतांत्रिक देशों से काफी अलग है। भारत में लोकसभा और विधानसभा के लिए अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्र निर्धारित होते हैं, जबकि इजरायल में पूरे देश को एक ही राष्ट्रीय निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है।
यहां मतदाता किसी खास उम्मीदवार के बजाय अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं। मतदान के दौरान गोपनीयता बनाए रखने के लिए कार्डबोर्ड की स्क्रीन लगाई जाती हैं। मतदाता अपनी पसंद की पार्टी के नाम या हिब्रू अक्षरों वाली पर्ची चुनकर उसे लिफाफे में रखते हैं और फिर मतपेटी में डाल देते हैं।
इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है। इसमें कुल 120 सदस्य होते हैं। किसी भी राजनीतिक दल को संसद में सीटें हासिल करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पड़े कुल वैध मतों में कम से कम 3.25 प्रतिशत वोट प्राप्त करना जरूरी है। इस न्यूनतम सीमा को इलेक्टोरल थ्रेशोल्ड कहा जाता है।
सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना होता है। दिलचस्प बात यह है कि इजरायल के इतिहास में ऐसा एक बार भी नहीं हुआ है कि कोई भी पार्टी अकेले अपने दमपर बहुमत हासिल कर पाई हो।
भारत और इजरायल की चुनाव प्रणालियों के बीच एक प्रमुख अंतर मतदान के तरीके का भी है। भारत में चुनाव के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि इजरायल में मतदान के लिए कागज की पर्चियों का उपयोग होता है। वहां मतदाता अपनी पसंद की पार्टी की पर्ची चुनकर गुप्त रूप से अपना वोट डालते हैं।
इजरायल में मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। कुछ परिस्थितियों में देश के एक हिस्से में मतदान जारी रहने के दौरान दूसरे हिस्सों में मतों की गिनती भी शुरू हो सकती है।
इजरायल में मतदान को लेकर जनता की राय काफी बंटी हुई है। मतदात एकमुश्त वोट करने की जगह अलग-अलग मुद्दों को ध्यान में रखकर मतदान करते हैं। ऐसे में किसी एक पार्टी को बहुमत मिलना काफी मुश्किल होता है। इसलिए इजरायल में आज तक कोई भी पार्टी अधिकतम 56 सीट ही जीत पाई है।
1949 से लेकर 2022 के आम चुनाव में सबसे ज्यादा सीटे जीतने वाली पार्टीयां:
इस चुनाव में अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा मतदाताओं की प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं। एक मीडिया सर्वे के मुताबिक, करीब 34 प्रतिशत मतदाता अर्थव्यवस्था की खराब स्थिति को सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा मानते हैं। वहीं, लगभग 32 प्रतिशत लोगों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषय है। इसके अलावा, अति-रूढ़िवादी यहूदी पुरुषों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है। इस बात को लेकर मतदाताओं की राय बंटी हुई है।
इजरायल में चुनाव के अंतिम और आधिकारिक परिणाम 4 नवंबर को जारी किए जाने हैं। इसके बाद राष्ट्रपति उस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं, जिसके पास आवश्यक समर्थन जुटाने की सबसे अधिक संभावना होती है।
सरकार बनाने के लिए नामित नेता को गठबंधन तैयार करने और बहुमत हासिल करने के लिए 28 दिन का समय दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर इस अवधि को 14 दिन और बढ़ाया जा सकता है।