इजरायल के खिलाफ विरोध, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Israel West Bank Death Penalty Law: मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच एक नया कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इजरायल की संसद द्वारा कब्जे वाले वेस्ट बैंक में ‘मौत की सजा’ का प्रावधान लागू करने वाले कानून को पारित किए जाने के बाद, 8 बड़े मुस्लिम देशों ने इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में इजरायल के इस नए कानून की कड़े शब्दों में निंदा की गई है। इन देशों का तर्क है कि यह कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है बल्कि मानवाधिकारों के सिद्धांतों के भी खिलाफ है।
संयुक्त बयान में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि इस कानून का इस्तेमाल विशेष रूप से फिलिस्तीनियों के खिलाफ किया जा सकता है। मुस्लिम देशों का आरोप है कि यह कानून भेदभावपूर्ण है और इसका उद्देश्य वेस्ट बैंक में रह रहे फिलिस्तीनी कैदियों को निशाना बनाना हो सकता है। बयान के अनुसार, इजरायल की यह नीति फिलिस्तीन की पहचान और उनके बुनियादी अधिकारों को नकारने वाली एक प्रणाली का हिस्सा है।
विदेश मंत्रियों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के उकसावे वाले कदम क्षेत्र में पहले से मौजूद अस्थिरता को और बढ़ाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून न केवल शांति प्रक्रिया को कमजोर करेगा बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। देशों ने इजरायल पर आरोप लगाया कि वह एक ऐसा भेदभावपूर्ण सिस्टम बना रहा है जो फिलिस्तीनियों के अस्तित्व को चुनौती देता है।
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बयान में इजरायली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों की स्थिति पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्टों के हवाले से कहा गया है कि कैदियों के साथ अत्याचार, यातना, अमानवीय व्यवहार और भोजन की कमी जैसी घटनाएं आम हो गई हैं। इन देशों ने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वे इस मुद्दे पर तुरंत हस्तक्षेप करें और इजरायल की जवाबदेही तय करें ताकि क्षेत्र में शांति बनाए रखी जा सके। इजरायल से आग्रह किया गया है कि वह ऐसे किसी भी कदम से बचे जो जमीनी स्तर पर तनाव को और भड़काने का काम करे।