विदेश मंत्री एस. जयशंकर की लक्ज़मबर्ग के राष्ट्राध्यक्ष से मुलाकात, इन 4 सेक्टर्स में बढ़ेगा सहयोग
Jaishankar Meets Grand Duke: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लक्ज़मबर्ग के राष्ट्राध्यक्ष से मुलाकात कर फिनटेक, स्पेस और AI जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया। यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देगा।
- Written By: प्रिया सिंह
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और लक्जमबर्ग के राष्ट्राध्यक्ष ग्रैंड ड्यूक गुइलौम (सोर्स-सोशल मीडिया)
Jaishankar Luxembourg Visit Fintech AI Space: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपनी लक्ज़मबर्ग यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। मंगलवार को उन्होंने लक्ज़मबर्ग के राष्ट्राध्यक्ष ग्रैंड ड्यूक गुइलौम से मुलाकात कर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस उच्च-स्तरीय वार्ता का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक और तकनीकी साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाना था। जयशंकर ने लक्ज़मबर्ग के नेतृत्व के सकारात्मक दृष्टिकोण की सराहना करते हुए इसे भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
राष्ट्राध्यक्ष के साथ कूटनीतिक चर्चा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लक्ज़मबर्ग के राष्ट्राध्यक्ष ग्रैंड ड्यूक गुइलौम के साथ बैठक कर आपसी हितों के विविध मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत के प्रति लक्ज़मबर्ग का दृष्टिकोण अत्यंत सकारात्मक और उत्साहजनक है। इस दौरान भारत की प्रगति और यूरोपीय देशों के साथ बढ़ते सहयोग को लेकर ग्रैंड ड्यूक ने अपनी गहरी रुचि व्यक्त की।
Honoured to call on HRH Grand Duke Guillaume of Luxembourg this afternoon. Conveyed the warm greetings of President Droupadi Murmu. Value his positive sentiments for India, and for deepening our bilateral partnership.@CourGrandDucale 🇮🇳 🇱🇺 pic.twitter.com/S3uNqPUScp — Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) January 6, 2026
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तकनीकी क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग
लक्ज़मबर्ग के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल के साथ हुई बैठक में जयशंकर ने सहयोग के नए द्वार खोलने पर बल दिया। उन्होंने फिनटेक, स्पेस टेक्नोलॉजी, डिजिटल डोमेन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भविष्य की साझेदारी का मुख्य आधार स्तंभ बताया है। जयशंकर के अनुसार इन क्षेत्रों में दोनों देश पहले के मुकाबले कहीं अधिक उत्पादक तरीके से एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं।
सॉलिड ट्रेड और सक्रिय समुदाय
लक्ज़मबर्ग में मौजूद सक्रिय भारतीय समुदाय की सराहना करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि हमारी द्विपक्षीय नींव बहुत मजबूत व्यापारिक खातों पर टिकी है। व्यापार के अलावा वर्तमान वैश्विक स्थिति और भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी दोनों नेताओं के बीच बेहद खुली और पारदर्शी चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण समय में भारत और लक्ज़मबर्ग जैसे देशों का करीब आना अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए बहुत आवश्यक है।
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भविष्य की ओर बढ़ते कदम
जेवियर बेटेल द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए धन्यवाद देते हुए जयशंकर ने संबंधों को फिर से नया स्वरूप देने के मौके पर जोर दिया। उन्होंने भरोसा जताया कि इन चर्चाओं से न केवल सरकारों को बल्कि दोनों देशों के उद्योगों और युवाओं को भी बड़े अवसर मिलेंगे। यह यात्रा यूरोपीय संघ के भीतर लक्ज़मबर्ग जैसे महत्वपूर्ण वित्तीय केंद्र के साथ भारत के जुड़ाव को और अधिक मजबूत बनाती है।
Frequently Asked Questions
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Que: विदेश मंत्री जयशंकर ने लक्ज़मबर्ग में किससे मुलाकात की?
Ans: उन्होंने लक्ज़मबर्ग के राष्ट्राध्यक्ष ग्रैंड ड्यूक गुइलौम और वहां के डिप्टी पीएम व विदेश मंत्री जेवियर बेटेल के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं।
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Que: भारत और लक्ज़मबर्ग किन विशेष क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे?
Ans: दोनों देशों ने फिनटेक (Fintech), स्पेस (Space), डिजिटल दुनिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में उत्पादक सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है।
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Que: जयशंकर ने राष्ट्राध्यक्ष को किसका संदेश दिया?
Ans: विदेश मंत्री ने ग्रैंड ड्यूक गुइलौम को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं और मैत्रीपूर्ण संदेश प्रेषित किया।
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Que: लक्ज़मबर्ग भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
Ans: लक्ज़मबर्ग यूरोप का एक प्रमुख वित्तीय केंद्र है और तकनीक व निवेश के मामले में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार देश है।
