अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा (सोर्स-सोशल मीडिया)
Trump Racist Video Controversy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट के कारण बड़े विवादों के केंद्र में आ गए हैं। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा को बंदर के रूप में दिखाने वाला एक AI वीडियो साझा किया है। यह पूरा घटनाक्रम ट्रम्प नस्लवादी वीडियो विवाद के रूप में देखा जा रहा है जिसने अमेरिकी राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने ट्रंप के इस व्यवहार को बेहद घिनौना और नस्लभेदी करार देते हुए रिपब्लिकन पार्टी से भी निंदा की मांग की है।
गुरुवार की रात ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर दर्जनों पोस्ट साझा कीं जिनमें से एक 62 सेकंड की यह विवादास्पद क्लिप थी। इस वीडियो में दावा किया गया है कि 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान वोटिंग मशीनों में जानबूझकर धांधली की गई थी। वीडियो में ट्रंप को ‘जंगल का राजा’ बताया गया है जो चुनावी धांधली के खिलाफ अकेले ही अपनी लड़ाई लड़ रहा है।
The full Barack Obama “monkey video” portrays numerous elected officials, Republicans and Democrats, as Lion King-like characters, with Trump as a lion and king of the jungle. Interesting how this fact is not being reported on. pic.twitter.com/nJz1IbSuDN — Loomer Unleashed (@LoomerUnleashed) February 6, 2026
वीडियो के सबसे विवादास्पद हिस्से में दो चिम्पांजी दिखाए गए हैं जिन पर बराक और मिशेल ओबामा के मुस्कुराते हुए चेहरे चिपकाए गए हैं। इतना ही नहीं, पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन को भी एक चिम्पांजी के रूप में चित्रित किया गया है जो शांति से केला खा रहा है। यह वीडियो क्लिप मूल रूप से एक मीम पेज से ली गई प्रतीत होती है जिसे ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया फीड पर जगह दी है।
कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूज़ोम ने इस पोस्ट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे एक राष्ट्रपति का बेहद घिनौना व्यवहार बताया है। न्यूज़ोम ने सभी रिपब्लिकन नेताओं से इस नस्लभेदी कृत्य की निंदा करने की अपील की है ताकि देश में स्वस्थ राजनीतिक माहौल बना रहे। वहीं पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बेन रोड्स ने कहा कि इतिहास ट्रंप को सबसे नकारात्मक व्यक्तित्व के रूप में हमेशा याद रखेगा।
यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ओबामा परिवार के बारे में इस तरह की भड़काऊ और व्यक्तिगत रूप से अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। अतीत में भी वे कई बार ओबामा की नागरिकता और उनके व्यक्तिगत जीवन पर नस्लवादी हमले करके विवादों को जन्म देते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वीडियो साझा करने का मकसद समर्थकों को उकसाना और चुनावी धांधली के दावों को हवा देना है।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने के बाद अमेरिकी समाज में ध्रुवीकरण और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि मामला रंगभेद से जुड़ा है। अश्वेत समुदाय के नेताओं ने इसे देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति के सम्मान पर सीधा प्रहार बताते हुए ट्रंप के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। फिलहाल ट्रुथ सोशल पर यह वीडियो मौजूद है और रिपब्लिकन खेमे की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।
पूरे अमेरिका में इस समय मानवाधिकार कार्यकर्ता और नागरिक समाज के लोग ट्रंप की इस हरकत के खिलाफ सड़कों और इंटरनेट पर आवाज उठा रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव परिणामों पर सवाल उठाना अलग बात है लेकिन पूर्व राष्ट्रपतियों का इस तरह अपमान करना निंदनीय है। ट्रंप के समर्थकों का एक गुट इसे केवल एक मजाक मान रहा है जबकि आलोचक इसे लोकतंत्र की गरिमा को गिराने वाला कृत्य बता रहे हैं।
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जांच के दौरान यह भी पता चला है कि यह वीडियो काफी हद तक AI तकनीक की मदद से तैयार किया गया है ताकि लोगों को भ्रमित किया जा सके। प्रौद्योगिकी के इस गलत इस्तेमाल ने अब अमेरिकी प्रशासन के सामने नई चुनौतियां पेश कर दी हैं जिन्हें रोकना अब सुरक्षा एजेंसियों के लिए जरूरी हो गया है। वीडियो साझा होने के बाद से ही ट्रुथ सोशल पर ट्रंप की पोस्ट को लाखों की संख्या में व्यूज मिल चुके हैं जिससे बहस और तेज हो गई है।