अमेरिका ने NATO से बाहर निकलने की धमकी दी (सोर्स- सोशल मीडिया)
US Threatens NATO to Exit: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) को लेकर एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि “नाटो हमारे काम नहीं आया जब हमें उनकी जरूरत थी, और अगर हमें फिर से उनकी जरूरत पड़ी तो वे तब भी नहीं होंगे। ग्रीनलैंड को याद रखो वह बड़ा बर्फ का टुकड़ा बुरे तरीके से चलाया जा रहा है।” ट्रंप की इस टिप्पणी ने नाटो महासचिव को असहज कर दिया।
ट्रंप ने बुधवार को NATO महासचिव मार्क रूट के साथ बंद कमरे में बैठक की, जिसमें उन्होंने अपनी नाराजगी और संगठन के प्रति शिकायतें दोहराईं। इस बैठक से पहले, जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया और गैस की कीमतें बढ़ गईं, तब ट्रंप ने संकेत दिया था कि यदि NATO सदस्य देशों ने उनका समर्थन नहीं किया तो अमेरिका नाटो से बाहर निकलने पर विचार कर सकता है।
बैठक के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि, “नाटो हमारे काम नहीं आया जब हमें उनकी जरूरत थी, और अगर हमें फिर से उनकी जरूरत पड़ी तो वे तब भी नहीं होंगे।” हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक इस पर कोई विस्तृत अपडेट नहीं दिया।
यह बैठक ऐसे समय पर हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर तय हुआ, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का प्रावधान था। इससे पहले ट्रंप ने धमकी दी थी कि यदि जरूरत पड़ी तो वह ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमला करेंगे और कहा था कि “आज रात पूरी सभ्यता मिट जाएगी।”
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने भी स्वीकार किया कि डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो से बाहर निकलने पर चर्चा की थी और कहा कि राष्ट्रपति कुछ घंटों में महासचिव रूट के साथ इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे।
पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में 2023 में पास किए गए कानून के तहत किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति को नाटो से बाहर निकलने के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेना अनिवार्य है। ट्रंप लंबे समय से NATO के आलोचक रहे हैं और अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने दावा किया था कि उनके पास अकेले ही नाटो से बाहर निकलने का अधिकार है।
नाटो की स्थापना 1949 में सोवियत संघ के खतरे के खिलाफ यूरोपीय सुरक्षा के लिए की गई थी। इसके 32 सदस्य देशों का मुख्य वादा आपसी रक्षा समझौता है, जिसमें एक पर हमला सभी पर हमला माना जाता है। यह समझौता अब तक केवल 2001 में 9/11 के बाद सक्रिय किया गया था। ट्रंप ने ईरान के साथ अपने युद्ध प्रयासों को लेकर यह शिकायत भी जताई कि नाटो अमेरिका के साथ खड़ा नहीं हुआ।
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इसके अलावा, ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर नाराजगी व्यक्त की है। ग्रीनलैंड नाटो सदस्य डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में वहां अमेरिकी नियंत्रण की मांग की थी, लेकिन बाद में रूट के साथ बातचीत के बाद पीछे हट गए।