ईरान का प्रस्ताव कूड़ेदान में...ट्रंप को पसंद नहीं आया 10 शर्तों वाला पीस प्लान, टूट जाएगा सीजफायर?

US-Iran Ceasefire: लेबनान पर इजरायली हमलों के बीच ईरान-अमेरिका युद्धविराम खतरे में है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव को 'कचरा' बताकर खारिज कर दिया है, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया है।
Donald Trump Rejects Iran 10 Point Proposal
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Donald Trump Rejects Iran 10 Point Proposal: ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुआ दो हफ्तों का युद्धविराम अब अनिश्चितता के दौर में पहुंचता नजर आ रहा है। लेबनान पर लगातार हो रहे इजरायली हमलों के कारण तनाव बढ़ गया है। ईरान (Iran) लगातार चेतावनी दे रहा है कि यदि ये हमले नहीं रुके तो वह सीजफायर से पीछे हट सकता है।

इसी बीच, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने ईरान के कथित 10 सूत्रीय प्रस्ताव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया था और इसे “कूड़ेदान में फेंक दिया गया।”

प्रस्ताव को अमेरिका-ईरान के बीच संशय

ईरान (Iran) ने पहले दावा किया था कि उसका 10-पॉइंट प्रस्ताव अमेरिका को स्वीकार्य था, लेकिन लेविट ने इसे गलत बताया। उनके अनुसार, यह प्रस्ताव “गैर-गंभीर” था और अमेरिकी नेतृत्व ने इसे बातचीत के लायक नहीं माना। हालांकि, बाद में ईरान की ओर से एक संशोधित योजना पेश की गई, जिसे अमेरिका ने अपने 15 सूत्रीय प्रस्ताव के साथ जोड़कर बातचीत के आधार के रूप में देखने की बात कही है।

लेविट ने यह भी दोहराया कि ट्रंप प्रशासन की “रेड लाइन” साफ है ईरान के भीतर यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) को पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान की “विश लिस्ट” को किसी समझौते के रूप में स्वीकार करना संभव नहीं है।

क्या है ईरान की 10 मांगे?

ईरान (Iran) के 10 सूत्रीय प्रस्ताव में कई बड़ी मांगें शामिल थीं, जैसे उस पर किसी भी तरह का हमला न होना, होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण बनाए रखना, यूरेनियम संवर्धन जारी रखने की अनुमति, सभी प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंधों को हटाना, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को समाप्त करना, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रस्तावों को खत्म करना, मुआवजा देना और क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी। इसके अलावा, लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की भी मांग की गई थी।

लेबनान पर हमले नहीं रूकने से स्थिति गंभीर

हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए यह सीजफायर ज्यादा समय तक टिकेगा या नहीं, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने संकेत दिया है कि इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता भी लेबनान में स्थिति पर निर्भर करेगी। इजरायल-लेबनान तनाव, ईरान-अमेरिका मतभेद और कूटनीतिक बयानबाजी इन सबके बीच यह संघर्षविराम बेहद नाजुक स्थिति में है और इसके टूटने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है।

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