मुजतबा खामेनेई और डोनाल्ड ट्रंप फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Donald Trump Iran Peace Talks: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बड़ा बयान देकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को समाप्त करने के लिए ‘बहुत अच्छी और उत्पादक’ बातचीत हुई है। इस बातचीत के बाद ट्रंप ने पांच दिनों के लिए हमलों पर रोक लगाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक अस्थायी युद्ध विराम की घोषणा की है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अमेरिका ईरान में किस नेता से बात कर रहा है?
जब पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या वे ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई से बात कर रहे हैं, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से ‘ना’ में जवाब दिया। ट्रंप ने कहा कि उनके पिता अली खामेनेई मारे जा चुके हैं और मुजतबा खामेनेई फिलहाल ‘अनुपलब्ध’ हैं। ट्रंप के अनुसार, वे ईरान के एक ऐसे व्यक्ति से बात कर रहे हैं जो उनके देश में “सबसे सम्मानित” है और वास्तविक ‘नेता’ की भूमिका निभा रहा है।
ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को सत्ता सौंपी गई थी। हालांकि, नियुक्ति के बाद से ही 56 वर्षीय मुजतबा को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, वे या तो गंभीर रूप से घायल होकर कोमा में हैं या रूस में अपना इलाज करा रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति ने सीआईए (CIA) और मोसाद (Mossad) जैसी खुफिया एजेंसियों को भी उलझन में डाल दिया है।
मिल रही जानकारी के अनुसार, इस बातचीत में कई नाम सामने आ रहे हैं जिनमें-
मोहम्मद बागीर गालीबाफ: ईरान की संसद के अध्यक्ष और पूर्व IRGC जनरल गालीबाफ इस समय नागरिक प्रशासन में सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं। वे मुजतबा के करीबी माने जाते हैं लेकिन उन्होंने अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत को “फेक न्यूज” करार दिया है।
अब्बास अराघची: ईरान के विदेश मंत्री अराघची एक अनुभवी राजनयिक हैं। पश्चिमी जगत उन्हें एक कुशल वार्ताकार के रूप में जानता है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि वर्तमान शासन व्यवस्था में उनके पास समझौता करने की पूर्ण शक्ति नहीं है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान युद्ध शुरू होने के बाद से हाशिए पर नजर आ रहे हैं। उन्होंने ट्रंप के दावों पर सीधा जवाब न देते हुए केवल सशस्त्र बलों की सराहना की है। दूसरी ओर, अहमद वाहिदी जैसे IRGC के कट्टरपंथी जनरल अमेरिका के प्रति कड़ा रुख अपनाए हुए हैं और बातचीत की संभावनाओं को खारिज कर रहे हैं।
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वर्तमान स्थिति यह है कि एक ओर ट्रंप शांति समझौते की उम्मीद जगा रहे हैं वहीं दूसरी ओर ईरान के भीतर सत्ता का केंद्र किसके पास है, यह अभी भी एक पहेली बना हुआ है। अगले पांच दिनों का युद्ध विराम यह तय करेगा कि क्या यह बातचीत किसी ठोस नतीजे पर पहुंचती है या यह केवल एक रणनीतिक पैंतरा है।