डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में सैन्य तैनाती बढ़ाई (सोर्स- सोशल मीडिया)
Denmark Deployed Troops in Greenland: डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है। सोमवार को डेनिश सेना के प्रमुख पीटर बॉयसेन अपनी एक नई टुकड़ी के साथ ग्रीनलैंड पहुंचे। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर संभावित कब्जे की धमकी दी थी। यूरोप और अमेरिका के बीच बढ़ती कूटनीतिक तनातनी के बीच, डेनमार्क की यह तैनाती क्षेत्रीय सुरक्षा और तनाव की चिंता को बढ़ा रही है।
रॉयल डेनिश आर्मी के सैनिकों ने पश्चिमी ग्रीनलैंड के कंगेरलुस्सुअक में लैंड किया। स्थानीय मीडिया, TV2 के अनुसार, सोमवार शाम को ग्रीनलैंड के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर डेनिश लड़ाकू सैनिक उतरे। डेनमार्क ने पिछले कुछ दिनों में आर्कटिक द्वीप पर अपनी मिलिट्री उपस्थिति लगातार बढ़ाई है।
आर्कटिक में डेनमार्क के शीर्ष सैन्य कमांडर, मेजर जनरल सोरेन एंडरसन ने बताया कि पहले से ही 100 सैनिक ग्रीनलैंड की राजधानी नुक में तैनात हैं। इसी संख्या में सैनिक पश्चिमी ग्रीनलैंड के कंगेरलुस्सुअक में मौजूद हैं, और सोमवार को एक और टुकड़ी वहां पहुंची। ये सैनिक विशेष रूप से “आर्कटिक एंड्योरेंस ट्रेनिंग एक्सरसाइज” में हिस्सा लेंगे।
एंडरसन ने कहा कि तैनात किए गए सैनिक जल्द लौटेंगे नहीं और मिशन लंबे समय तक चलने वाला है। उन्होंने यह भी बताया कि 2026 और उसके बाद भी सैनिकों की तैनाती की योजना बनाई जा रही है। डेनमार्क सरकार ने ग्रीनलैंड में नाटो मिशन की आवश्यकता का प्रस्ताव भी दिया है। डेनिश रक्षा मंत्री ट्रोल्स लुंड पॉलसेन ने ब्रसेल्स में नाटो प्रमुख मार्क रूट के साथ बैठक के बाद कहा कि ग्रीनलैंड पर कोई भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई नाटो समझौते को प्रभावित कर सकती है।
यह भी पढ़ें: ट्रंप की दूसरी पारी के एक साल पूरे…टैरिफ से लेकर वेनेजुएला पर हमले तक, 10 पांइटस में देखें रिपोर्ट कार्ड
डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के कारण डेनमार्क में आक्रोश है। डेनमार्क, ग्रीनलैंड और यूरोप के नेताओं ने बार-बार अमेरिका को आक्रामक कदम उठाने से रोकने की अपील की है, लेकिन ट्रंप ने आक्रामक रुख जारी रखा। ग्रीनलैंड, लगभग 57,000 लोगों की आबादी वाला क्षेत्र है, जिसकी सुरक्षा और विदेश नीति पूरी तरह डेनमार्क के नियंत्रण में है। इस विवाद के कारण क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है और संभावित सैन्य संकट की आशंका भी बढ़ रही है।