क्यूबा मिसाइल संकट: जब अमेरिका के शहरों पर मंडराने लगा था परमाणु हमले का खतरा, थमी रहीं दुनिया की सांसें

US-Soviet Union Nuclear War 1962: अक्टूबर 1962 में क्यूबा मिसाइल संकट ने दुनिया को परमाणु युद्ध के करीब पहुंचा दिया था। जानिए कैसे अमेरिका और सोवियत संघ ने समझौते से टाली तबाही।
Cuban Missile Crisis 1962
रूसी परमाणु मिसाइल(सोर्स- सोशल मीडिया)
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https://navbharatlive.com/india/martin-luther-king-jr-nonviolent-civil-rights-movement-gandhi-inspiration-nkr24Highlights:

  • अक्टूबर 1962 में क्यूबा मिसाइल संकट ने दुनिया को परमाणु युद्ध के करीब पहुंचाया।

  • सोवियत संघ ने अमेरिका के नजदीक क्यूबा में परमाणु मिसाइलें तैनात की थीं।

  • अमेरिकी U-2 जासूसी विमान की तस्वीरों से मिसाइल ठिकानों का पता चला।

  • राष्ट्रपति केनेडी ने क्यूबा की ओर जाने वाले सैन्य सामान पर नौसैनिक नाकाबंदी लगाई।

Cuban Missile Crisis 1962: अक्टूबर 1962, दुनिया के दो सबसे ताकतवर देश एक-दूसरे के सामने खड़े थे। समंदर में युद्धपोत तैनात थे, आसमान में जासूसी विमान उड़ रहे थे और हजारों किलोमीटर दूर बैठे दो नेताओं के हाथों में पूरी दुनिया की किस्मत थी। एक गलत फैसला करोड़ों लोगों की जिंदगी खत्म कर सकता था।

अमेरिका के तट से महज 150 किलोमीटर दूर क्यूबा में सोवियत संघ ने परमाणु मिसाइलें तैनात कर दी थीं। अब अमेरिका के बड़े शहर सीधे निशाने पर थे। हालात ऐसे थे कि किसी भी वक्त परमाणु युद्ध शुरू हो सकता था। इस संकट को इतिहास में क्यूबा मिसाइल संकट के नाम से जाना जाता है। अक्टूबर 1962 के वे 13 दिन दुनिया को परमाणु तबाही के बेहद करीब ले आए थे।

क्यूबा में मिसाइलें क्यों तैनात कर रहा था रूस?

इस कहानी को समझने के लिए शीत युद्ध के दौर में लौटना होगा। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और सोवियत संघ के बीच दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति बनने की होड़ शुरू हो गई थी। दोनों देश परमाणु हथियार जमा कर रहे थे और एक-दूसरे की सीमाओं के करीब सैन्य ठिकाने बना रहे थे। अमेरिका ने तुर्की और इटली जैसे देशों में परमाणु मिसाइलें तैनात कर रखी थीं। सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव इसे अपने देश के लिए खतरा मानते थे।

Cuban Missile Crisis 1920
फिदेल कास्त्रो, निकिता ख्रुश्चेव(सोर्स- सोशल मीडिया)

इसी बीच अमेरिका के पड़ोसी देश क्यूबा में फिदेल कास्त्रो की कम्युनिस्ट सरकार सत्ता में आ चुकी थी। अमेरिका कम्युनिस्ट सरकार को हमेशा से अपने लिए खतरा मानता था ऐसे में जल्द ही उसके रिश्ते क्यूबा बिगड़ने लगे। 1961 में अमेरिका के समर्थन से क्यूबा के निर्वासित लड़ाकों ने कास्त्रो की सरकार गिराने की कोशिश की, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

इसके बाद सोवियत संघ ने क्यूबा को सैन्य मदद देने का फैसला किया। ख्रुश्चेव के लिए यह अमेरिका को जवाब देने का मौका भी था। अगर सोवियत मिसाइलें क्यूबा में तैनात हो जातीं, तो अमेरिकी शहर उनकी सीधी पहुंच में आ जाते।

हथियारों जखीरा देख अमेरिका के उड़े होश

अमेरिका को क्यूबा में सोवियत सैन्य गतिविधियों पर शक था। निगरानी के लिए अमेरिकी U-2 जासूसी विमान लगातार जानकारी जुटा रहे थे। 14 अक्टूबर 1962 को एक U-2 विमान ने क्यूबा के ऊपर उड़ान भरी और वहां की 928 तस्वीरें खींचीं। तस्वीरों से पता चला कि सोवियत संघ वहां परमाणु मिसाइल ठिकाने तैयार कर रहा था।

Cuban Missile Crisis 1962
अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी(सोर्स- सोशल मीडिया)

जब यह जानकारी अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी तक पहुंची, तो अमेरिकी प्रशासन में हड़कंप मच गया। अब खतरा सिर्फ क्यूबा तक सीमित नहीं था। इन मिसाइलों से अमेरिका के कई अहम ठिकानों और शहरों को निशाना बनाया जा सकता था।

केनेडी के सामने तीन रास्ते थे हवाई हमला, क्यूबा पर सैन्य आक्रमण या बातचीत। लेकिन हर विकल्प के साथ परमाणु युद्ध का खतरा जुड़ा था।

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समुद्र में आमने-सामने थीं दोनों महाशक्तियां

22 अक्टूबर को केनेडी ने अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए क्यूबा में सोवियत मिसाइलों की मौजूदगी का खुलासा किया। उन्होंने क्यूबा की ओर जाने वाले आक्रामक सैन्य साजोसामान को रोकने के लिए नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा की। अमेरिकी युद्धपोत समुद्र में तैनात हो गए। दूसरी ओर, सोवियत जहाज क्यूबा की ओर बढ़ रहे थे।

Cuban Missile Crisis 1962
अमेरिकी सैन्य बेस(सोर्स- सोशल मीडिया)

अब पूरी दुनिया की निगाहें कैरेबियन सागर पर थीं। अगर सोवियत जहाज अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश करते और दोनों देशों की सेनाओं के बीच गोलीबारी शुरू हो जाती, तो हालात किसी के नियंत्रण में नहीं रहते।एक तरफ अमेरिका अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहता था, तो दूसरी तरफ सोवियत संघ भी अपनी रणनीतिक स्थिति से पीछे हटने को तैयार नहीं था।

परमाणु युद्ध का सबसे खतरनाक मोड़

27 अक्टूबर को संकट और गहरा गया। क्यूबा के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी U-2 विमान को मार गिराया गया और उसके पायलट की मौत हो गई। अमेरिका में जवाबी कार्रवाई की मांग तेज हो गई। सैन्य अधिकारी क्यूबा पर हमले की तैयारी के विकल्पों पर विचार कर रहे थे। लेकिन केनेडी जानते थे कि अमेरिकी हमला सोवियत संघ को भी युद्ध में खींच सकता है। इसी दौरान दोनों देशों के बीच गुप्त बातचीत जारी रही। आखिरकार कूटनीति ने उस रास्ते को खोला, जो सैन्य कार्रवाई से बंद हो सकता था।

cuban missile crisis 1962
समझौते के बाद दोनों देशों ने परमाणु मिसाइलें हटाई(सोर्स- सोशल मीडिया)

समझौते के बाद दुनिया ने ली राहत की सांस

28 अक्टूबर 1962 को सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने घोषणा की कि सोवियत संघ क्यूबा से अपनी परमाणु मिसाइलें हटा लेगा। इसके बदले अमेरिका ने क्यूबा पर हमला न करने का आश्वासन दिया। गुप्त समझौते के तहत अमेरिका तुर्की से अपनी जुपिटर परमाणु मिसाइलें हटाने पर भी सहमत हुआ। हालांकि, इस समझौते का यह हिस्सा तत्काल सार्वजनिक नहीं किया गया। इस तरह दुनिया पर मंडराता परमाणु युद्ध का खतरा टल गया।

Cuban Missile Crisis 1962
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