नाचते-नाचते कपड़े उतारकर बनी मशहूर डांसर, जासूसी के लिए मिली सजा, मौत से पहले बंदूकों को दिया था फ्लाइंग किस

Mata Hari Spy Story: प्रथम विश्व युद्ध की मशहूर डांसर माता हारी पर जर्मनी के लिए जासूसी करने का आरोप लगा। 1917 में उनकी गिरफ्तारी, मुकदमे और फांसी की कहानी आज भी विवादों से घिरी है।
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माता हारी(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • माता हारी का असली नाम मार्गेटे जेले था, जन्म नीदरलैंड में हुआ।

  • डच ईस्ट इंडीज में रहते हुए उनकी भारतीय नृत्य कला में रुचि बढ़ी।

  • पेरिस में डांस कार्यक्रमों से माता हारी यूरोप में मशहूर हुईं।

  • 1917 में फ्रांस ने एच 21 कोड के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया।

Mata Hari Execution in 1917: फायरिंग स्क्वॉड की बंदूकें तनी थीं और सामने मौत खड़ी थी एक औरत, लेकिन चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। जेलर के कहने पर संतरी उसकी आंखों पर पट्टी बांधने के लिए आगे बढ़ा पर उसने इससे साफ इनकार कर दिया। मौत सामने खड़ी पर उसने रोने या चीखने की जगह मुस्कुराने को चुना और जेलर के इशारे पर फायरिंग स्क्वॉड की बंदूकें खुली, तो उसने ठीक इससे पहले एक फ्लाइंग किस हवा में उछाला और हमेशा का लिए शांत हो गई। हम बात कर रहे हैं प्रथम विश्व युद्ध की सबसे बड़ी महिला जासूस माता हारी की। 

माता हारी प्रथम विश्व युद्ध के दौर में यूरोप की मशहूर डांसर थी, जिनके खूबसूरती और अदाओं दीवाने दोनों तरफ थे। एक ओर जहां फ्रांस में उसका हर शो हाउसफुल जाता था। वहीं युद्ध के दौर में वह अकेली ऐसी महिला थी जो जर्मनी में कहीं भी किसी भी रोक टोक के जा सकती थी। लेकिन उसकी इसी आजादी ने पहले उसे जासूस बनाया और फिर मौत के घाट उतार दिया। 

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माता हारी(सोर्स- सोशल मीडिया)

माता हारी का भारत से था गहरा संबंध

माता हारी का जन्म 1876 में नीदरलैंड में हुआ था। उनका असली नाम मार्गेटे जेले था। उनके पिता एक व्यापारी थे, लेकिन बाद में उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। मार्गेटे की शादी 18 साल की उम्र में नीदरलैंड की सेना में अधिकारी रहे एक व्यक्ति से हो गई।

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माता हारी का असली नाम मार्गेटे जेले था(सोर्स- सोशल मीडिया)

शादी के बाद वह अपने पति के साथ डच ईस्ट इंडीज चली गईं, जिसे आज इंडोनेशिया के नाम से जाना जाता है। इस दौरान उनके दो बच्चे हुए, लेकिन पहले बच्चे की जन्म के तुरंत बाद मौत हो गई। कुछ समय बाद पति पत्नी के रिश्तों में तनाव बढ़ने लगा। आखिरकार दोनों अलग हो गए और 1907 में उनका तलाक हो गया। यही वो समय था जब उसने डच ईस्ट इंडीज में रहते हुए अपने दुख और बोरियत से निकलने के लिए डांस सीखना शुरू किया और और इसकी दिलचस्पी भारतीय नृत्य कला में बढ़ी। इसके बाद ही उसने अपना नाम बदलकर माता हारी रख लिया। 

पेरिस पहुंचकर बनीं मशहूर डांसर

माता हारी इसके बाद पेरिस चली गईं। वहां उन्होंने डांस की दुनिया में कदम रखा और मशहूर हो गईं। मलय भाषा में माता हारी का मतलब सूर्य होता है। उनके डांस का अंदाज उस समय के लिए काफी अलग था। वह मंच पर धीरे धीरे अपने कपड़े उतारती थीं और इसी वजह से उनके कार्यक्रमों की काफी चर्चा होने लगी।

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इंडोनेशिया में सीखा था भारतीय नृत्य (सोर्स- सोशल मीडिया)

उनकी लोकप्रियता पेरिस से निकलकर यूरोप के दूसरे हिस्सों तक पहुंच गई। उनके कार्यक्रमों में कई प्रभावशाली लोग शामिल होते थे। सैन्य अधिकारी, राजनयिक और बड़े कारोबारी उनसे मिलने आते थे। इस पहचान और संपर्कों ने आगे चलकर उनकी जिंदगी में अहम भूमिका निभाई।

पहले विश्व युद्ध के दौरान जासूसी के आरोप

जब पहला विश्व युद्ध शुरू हुआ, तब माता हारी यूरोप में एक मशहूर कलाकार बन चुकी थीं। उनके संपर्क कई देशों के अधिकारियों से थे। इसी वजह से उन पर खुफिया जानकारी जुटाने और उसे दूसरे देशों तक पहुंचाने के आरोप लगे।

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प्रथम विश्व युद्ध में फ्रांस ने बनाया था जासूस(सोर्स- सोशल मीडिया)

बताया जाता है कि फ्रांस ने भी उन्हें जासूसी के काम में शामिल किया था। उनके संपर्कों के जरिए सैन्य अधिकारियों और राजनयिकों से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई। हालांकि, उनकी जासूसी गतिविधियों की वास्तविक सीमा और उनसे मिली जानकारी को लेकर इतिहासकारों के बीच मतभेद रहे हैं। माता हारी पर सबसे गंभीर आरोप यह था कि वह फ्रांस के लिए काम करने के साथ-साथ जर्मनी को भी गोपनीय जानकारी दे रही थीं। इस तरह उन्हें डबल एजेंट के रूप में देखा जाने लगा।

कोड नाम एच 21 बना गिरफ्तारी की वजह

साल 1917 में फ्रांस की सरकार ने माता हारी को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें पेरिस के एक लग्जरी होटल से हिरासत में लिए जाने की बात कही जाती है। फ्रांसीसी अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें जर्मनी की राजधानी बर्लिन भेजे गए एक संदेश के आधार पर संदेह के घेरे में लिया गया था। इस संदेश में एच 21 कोड का इस्तेमाल किया गया था।

फ्रांसीसी अधिकारियों ने माना कि यह कोड माता हारी से जुड़ा था। इसके बाद उनके खिलाफ जासूसी का मामला चलाया गया। करीब पांच महीने तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें दोषी ठहरा दिया गया।

उन पर आरोप लगाया गया कि उनकी जासूसी के कारण फ्रांस के करीब 50 हजार सैनिकों की मौत हुई। हालांकि, इस दावे को साबित करने वाले ठोस सबूतों को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि उनकी ओर से दी गई किस जानकारी के कारण इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों की मौत हुई थी।

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माता हारी को बनाया गया बलि का बकरा

पहले विश्व युद्ध के दौरान फ्रांस की सेना मुश्किल दौर से गुजर रही थी। लगातार लड़ाई के कारण सैनिकों का मनोबल गिर रहा था और सेना के कुछ हिस्सों में विद्रोह की घटनाएं भी सामने आई थीं। ऐसे हालात में देश की सरकार पर दबाव था कि वह जासूसी और सैन्य नुकसान के मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करे।

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फ्रांस पर बलि का बकरा बनाने का आरोप(सोर्स- सोशल मीडिया)

कई इतिहासकारों का मानना है कि माता हारी को उस समय बलि का बकरा बनाया गया हो सकता है। उनके मुताबिक, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की तुलना में उपलब्ध सबूत कमजोर थे। उनकी प्रसिद्धि, प्रभावशाली लोगों से संपर्क और एक विदेशी कलाकार के रूप में उनकी पहचान ने भी उन्हें संदेह के घेरे में ला दिया।

हालांकि, इस बात पर आज भी पूरी सहमति नहीं है कि माता हारी पूरी तरह निर्दोष थीं या उन्होंने वास्तव में जर्मनी के लिए जासूसी की थी। उनके मामले से जुड़े कई दस्तावेजों और घटनाओं की व्याख्या को लेकर विवाद बना हुआ है।

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खंभे से बांधे जाने से किया इनकार

कहा जाता है कि तय प्रक्रिया के तहत उनके हाथ एक खंभे से बांधे जाने थे, लेकिन उन्होंने केवल एक हाथ बंधवाया और दूसरे हाथ से अपने वकील का अभिवादन किया। इसके बाद सैनिकों ने उन पर गोलियां चलाईं। इस तरह 15 अक्टूबर 1917 को फ्रांस में माता हारी को गोली मारकर मौत की सजा दी गई थी।

उस समय उनकी उम्र 41 साल थी। उनकी मौत के बाद शव लेने के लिए कोई नहीं पहुंचा। बताया जाता है कि उनके शरीर को मेडिकल अध्ययन के लिए भेज दिया गया था। उनके सिर को कई दशकों तक सुरक्षित रखे जाने और बाद में चोरी हो जाने की कहानी भी प्रचलित है।

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