क्यूबा में ब्लैकआउट, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Cuba Nationwide Blackout News: कैरिबियाई देश क्यूबा इस समय अपने सबसे बुरे ऊर्जा संकट से गुजर रहा है। शनिवार, 21 मार्च 2026 को देश का नेशनल पावर ग्रिड एक बार फिर पूरी तरह धराशायी हो गया है जिससे पूरे द्वीप पर अंधेरा छा गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च के महीने में यह तीसरी बार है जब क्यूबा को ‘टोटल ब्लैकआउट’ का सामना करना पड़ा है। यह संकट ऐसे समय में आया है जब देश पहले से ही चरमराती बुनियादी संरचना और कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहा है।
क्यूबा के ऊर्जा और खान मंत्रालय के तहत आने वाले ‘क्यूबन इलेक्ट्रिक यूनियन’ ने जानकारी दी कि शनिवार को यह व्यापक ब्लैकआउट कैमगुए प्रांत में स्थित नुएविटास थर्मोइलेक्ट्रिक प्लांट की एक जनरेटिंग यूनिट में अचानक आई खराबी के कारण हुआ। मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इस खराबी ने ऑनलाइन चल रही अन्य मशीनों पर ‘कास्केडिंग इफेक्ट’ पैदा किया जिससे पूरा सिस्टम ही ठप्प हो गया।
प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए अस्पतालों, जल प्रणालियों और महत्वपूर्ण केंद्रों को बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु ‘माइक्रो-आइलैंड्स’ को सक्रिय किया है लेकिन सामान्य आबादी के लिए बिजली की बहाली में अभी समय लग सकता है।
लगातार हो रहे इन ब्लैकआउट्स ने क्यूबा के आम नागरिकों के जीवन को नर्क बना दिया है। लोगों को खाना पकाने के लिए बिजली नहीं मिल रही है और रेफ्रिजरेटर बंद होने के कारण घरों में रखा खाना बर्बाद हो रहा है। कई इलाकों में काम के घंटे कम कर दिए गए हैं और स्थिति इतनी गंभीर है कि कुछ अस्पतालों को महत्वपूर्ण सर्जरी तक रद्द करनी पड़ी हैं। स्थानीय लोग सड़कों पर अंधेरे में वक्त गुजारने को मजबूर हैं।
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने इस संकट के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि पिछले तीन महीनों से क्यूबा को विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से तेल की कोई खेप नहीं मिली है। वर्तमान में क्यूबा अपनी जरूरत का केवल 40% ईंधन ही पैदा कर पाता है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा पर दबाव बढ़ाते हुए ‘ऊर्जा नाकाबंदी’ लगा रखी है। ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो भी देश क्यूबा को तेल बेचेगा, उस पर भारी टैरिफ लगाए जाएंगे। अमेरिका की मांग है कि क्यूबा राजनीतिक कैदियों को रिहा करे और अपने देश में लोकतांत्रिक बदलाव लाए। ट्रंप ने यहां तक संकेत दिया है कि क्यूबा की सरकार गिरने की कगार पर है और उन्होंने ‘क्यूबा के मैत्रीपूर्ण अधिग्रहण’ की संभावना भी जताई है।
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क्यूबा की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब उसके सबसे भरोसेमंद सहयोगी वेनेजुएला में नेतृत्व परिवर्तन हुआ जिसके बाद वहां से आने वाली पेट्रोलियम की महत्वपूर्ण खेप रुक गई। पुरानी होती मशीनरी और ईंधन की भारी कमी ने क्यूबा के ऊर्जा तंत्र को पूरी तरह से अस्थिर कर दिया है।