चीन ने ऑस्ट्रेलिया को जेट फ्यूल का निर्यात रोका (सोर्स-सोशल मीडिया)
China Stops Jet Fuel Exports To Australia: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष का असर अब ऑस्ट्रेलिया के विमानन क्षेत्र पर बहुत बुरा पड़ने लगा है। चीन ने अचानक ऑस्ट्रेलिया को सप्लाई होने वाले जेट फ्यूल के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद ऑस्ट्रेलिया में तरल ईंधन की भारी कमी और कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा पैदा हो गया है। दुनिया भर में मची इस उथल-पुथल के बीच अब ऑस्ट्रेलिया की हवाई यात्राओं पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
चीन ने अपनी तेल रिफाइनरियों को सभी प्रकार के ईंधन के निर्यात को तुरंत प्रभाव से रोकने का आदेश दिया है। इस प्रतिबंध के कारण ऑस्ट्रेलिया आने वाले कम से कम दो बड़े तेल जहाजों का परिचालन प्रभावित हुआ है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण तेल आपूर्ति काफी अस्थिर है।
ऑस्ट्रेलिया अपनी जरूरतों के लिए पूरी तरह से जेट फ्यूल के आयात पर निर्भर है क्योंकि वह इसे खुद नहीं बनाता। साल 2025 में ऑस्ट्रेलिया ने अपनी कुल जरूरत का लगभग 32 प्रतिशत जेट फ्यूल अकेले चीन से मंगवाया था। सिडनी एयरपोर्ट के अधिकारियों के मुताबिक अब वैकल्पिक देशों से ईंधन मंगवाना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।
मार्च 2026 तक ऑस्ट्रेलिया के पास केवल 29 से 32 दिनों का ही जेट फ्यूल का स्टॉक बचा हुआ है। देश के पास लगभग 802 मिलियन लीटर ईंधन मौजूद है जो कि केवल कुछ ही हफ्तों के लिए पर्याप्त है। स्टॉक कम होने के कारण अब आपातकालीन और सैन्य उड़ानों को प्राथमिकता देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
ईंधन की कमी के डर से एयर न्यूजीलैंड ने पहले ही अपनी 1,100 उड़ानों को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है। क्वांटस जैसी दिग्गज एयरलाइन ने भी चेतावनी दी है कि आने वाले समय में टिकटों की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं। हवाई अड्डों पर ईंधन रेशनिंग की संभावना बढ़ गई है जिससे व्यावसायिक उड़ानों में भारी कटौती की जा सकती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हाल ही में दो परिवहन जहाजों के नष्ट होने से समुद्री सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है। यह क्षेत्र दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है जहां से होकर अधिकांश ईंधन के जहाज गुजरते हैं। ईरान द्वारा यूएई के बंदरगाहों पर हमले की तैयारी की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में और अधिक डर पैदा कर दिया है।
चीन से सप्लाई रुकने के बाद ऑस्ट्रेलिया अब भारत, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की ओर देख रहा है। हालांकि इन देशों की अपनी आपूर्ति भी पश्चिम एशिया के वर्तमान संघर्ष के कारण बहुत बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के लिए दूसरे देशों से तुरंत पर्याप्त ईंधन का प्रबंध करना बहुत मुश्किल होता जा रहा है।
बढ़ते ऊर्जा संकट को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने 400 मिलियन बैरल का आपातकालीन तेल स्टॉक जारी किया है। यह मात्रा साल 2022 में यूक्रेन संकट के दौरान जारी किए गए स्टॉक की तुलना में लगभग दोगुनी बताई जा रही है। इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया अपनी आईईए प्रतिबद्धताओं के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मदद देने की स्थिति में फिलहाल नहीं है।