चेचेन लड़ाकों की जंग में एंट्री, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Chechen Fighters Ground Operation Iran: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध अब एक नए और अधिक खतरनाक चरण में पहुंच सकता है। अमेरिका द्वारा ईरान पर संभावित ‘ग्राउंड ऑपरेशन’ की चर्चाओं के बीच रूस के सबसे क्रूर और अनुशासित माने जाने वाले चेचेन लड़ाकों की इस जंग में एंट्री होने जा रही है। ईरानी सरकारी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ की रिपोर्ट के अनुसार, चेचेन सैन्य इकाइयों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि अमेरिकी सेना ईरान की धरती पर कदम रखती है तो वे ईरानी सशस्त्र बलों की सहायता के लिए वहां तैनात होने के लिए तैयार हैं।
चेचेन लड़ाकों को उनकी क्रूरता और युद्ध कौशल के लिए जाना जाता है। ये लड़ाके गोरिल्ला स्टाइल फाइटिंग, एम्बुश (घात लगाकर हमला करना) और शहरों में होने वाली आमने-सामने की लड़ाई में विशेषज्ञ माने जाते हैं। मार्च 2026 की शुरुआत में कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अप्ती अलाउदिनोव ने भी संकेत दिए थे कि रूसी नेतृत्व का फैसला होते ही वे ईरान कूच कर सकते हैं। ये वही लड़ाके हैं जिन्होंने 1990 के दशक में रूसी सेना को कड़ी टक्कर दी थी लेकिन अब वे पुतिन के सबसे वफादार सहयोगियों में तब्दील हो चुके हैं।
रूस के चेचन गणराज्य के प्रमुख रमजान कादिरोव के प्रति वफादार ये लड़ाके इस संघर्ष को केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि ‘जेहाद’ की तरह देख रहे हैं। उनके लिए अमेरिका और इजरायल के खिलाफ लड़ना एक मजहबी और वैचारिक जुनून है। यूक्रेन युद्ध में भी इन लड़ाकों ने अपनी तेजी और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की क्षमता से अपनी अलग पहचान बनाई है और अब वही मॉडल वे ईरान में दोहराने की तैयारी में हैं।
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चेचेन लड़ाकों की तैनाती रूस के लिए एक ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’ का हिस्सा है। इसके जरिए रूस सीधे तौर पर अमेरिका से सैन्य टकराव किए बिना अपने सहयोगी ईरान को मजबूत समर्थन दे सकता है। यह अमेरिका के लिए एक साफ संकेत है कि पश्चिम एशिया में रूस अभी भी एक प्रभावशाली खिलाड़ी है। दिलचस्प बात यह है कि इस जंग में रूस का प्रतिद्वंद्वी यूक्रेन भी खाड़ी देशों (सऊदी अरब-यूएई) के जरिए अमेरिका की मदद कर रहा है जिससे यह युद्ध और भी जटिल हो गया है।
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पेंटागन द्वारा ईरान में जमीनी सेना भेजने के संकेतों के बाद चेचेन लड़ाकों की यह चुनौती अमेरिकी रणनीति को बदल सकती है। यदि ये लड़ाके ईरान के पहाड़ी इलाकों और शहरों में मोर्चा संभालते हैं तो अमेरिकी सेना के लिए जमीनी स्तर पर आगे बढ़ना बेहद मुश्किल और खूनी साबित हो सकता है।