कनाडा के पीएम मार्क कार्नी आएंगे भारत, दो साल के कूटनीतिक तनाव के बाद रिश्तों में नई शुरुआत

Mark Carney India Visit: दो साल के तनाव के बाद कनाडा के पीएम मार्क कार्नी भारत आएंगे। यात्रा का लक्ष्य CEPA वार्ता करना और 2030 तक व्यापार को 50 अरब डॉलर पहुंचाना है। US टैरिफ के बीच यह दौरा अहम है।
Canadian PM Mark Carney's India Visit: Resetting Ties After Two Years of Diplomatic Strain
कनाडा के पीएम मार्क कार्नी आएंगे भारत (सोर्स-AI डिज़ाइन)
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PM Mark Carney India visit 2026 trade CEPA: भारत और कनाडा के बीच बीते दो वर्षों से चली आ रही कूटनीतिक कड़वाहट अब खत्म होने की कगार पर है। कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी जल्द ही भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर आने वाले हैं, जिसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए 'रीसेट बटन' माना जा रहा है। यह दौरा न केवल व्यापार और निवेश के मोर्चे पर महत्वपूर्ण है, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच दोनों देशों के लिए एक रणनीतिक जरूरत भी बन गया है।

कूटनीतिक रिश्तों का पुनरुद्धार

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की यह यात्रा 2023 के निज्जर विवाद के बाद ठंडे पड़े रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाने की एक गंभीर कोशिश है। कार्नी ने नवंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण को स्वीकार किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के नेतृत्व अब पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़कर सुरक्षा, तकनीक और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के इच्छुक हैं।

व्यापार और आर्थिक लक्ष्य

कार्नी की इस यात्रा का एक प्रमुख केंद्र बिंदु 'व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता' (CEPA) होगा, जिस पर बातचीत लंबे समय से रुकी हुई थी। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर के महत्वाकांक्षी स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। भारतीय केंद्रीय बजट के ठीक बाद होने वाले इस दौरे से कनाडा के पेंशन फंड और निवेशकों के लिए भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में नए रास्ते खुल सकते हैं।

ट्रंप टैरिफ का वैश्विक प्रभाव

वैश्विक व्यापार परिदृश्य में अमेरिका की सख्त टैरिफ नीति ने भारत और कनाडा दोनों को अपने बाजारों के विविधीकरण (Diversification) के लिए मजबूर कर दिया है। जहां भारतीय निर्यात पर भारी शुल्क लगाए गए हैं, वहीं कनाडा भी अपनी अमेरिकी निर्भरता कम कर गैर-अमेरिकी निर्यात को अगले दशक में दोगुना करना चाहता है। ऐसे में भारत, कनाडा के लिए एक स्थिर और विशाल बाजार के रूप में उभर रहा है, जो दोनों देशों के आर्थिक हितों को जोड़ता है।

रणनीतिक और तकनीकी सहयोग

व्यापार के अलावा, दोनों नेता उभरती प्रौद्योगिकियों (AI), साइबर सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्रों में गहरे सहयोग पर चर्चा करेंगे। उच्च स्तरीय राजनयिकों की वापसी के बाद अब दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने और वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर भी सहमति बन सकती है। स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की सप्लाई चैन में साझेदारी भी इस यात्रा के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल रहेगी।

भरोसे की नई शुरुआत

कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पत्नायक के अनुसार, कार्नी के नेतृत्व में कनाडा के रुख में सकारात्मक बदलाव आया है और अब 'सिस्टम में भरोसा' लौट रहा है। दोनों देशों के बीच कानून प्रवर्तन और सुरक्षा संवाद में हुई प्रगति ने भी इस दौरे के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। अगर यह यात्रा सफल रहती है, तो यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक नई और मजबूत साझेदारी की नींव रख सकती है।

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