शरिया पढ़ने वाले की एंट्री बैन...इस देश के राष्ट्रपति ने कर दिया बड़ा ऐलान, बोले- लागू नहीं होगा इस्लामी कानून

Burkina Faso: बुर्किना फासो के राष्ट्रपति इब्राहिम ट्राओरे का शरिया कानून पर बड़ा बयान वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप और धार्मिक सद्भाव को बनाए रखने पर जोर दिया।
Ibrahim Traore Sharia Law Statement
बुर्किना फासो के राष्ट्रपति कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Ibrahim Traore Sharia Law Statement: बुर्किना फासो के राष्ट्रपति कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे ने हाल ही में देश के इस्लामीकरण को लेकर बड़ा  बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वो अपने देश में कभी भी शरिया कानून लागू नहीं होने देंगे। उन्होंने उन छात्रों वापस देश न आने की चेतावनी दी है जो शरिया की पढ़ाके के लिए सऊदी अरब गए हैं।  इब्राहिम ट्राओरे ने कहा कि मैं मुस्लिम हूं, लेकिन देश में हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि बुर्किना फासो में कभी भी शरिया कानून नहीं लागू होगा। बुर्किना फासो लंबे समय से धार्मिक हिंसा का शिकार रहा है। यहां इस्लामी आतंकवादियों के कई संगठन सक्रिय हैं, जो देश में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं।

देश लौटने की जरूरत नहीं

बुर्किना फासो के राष्ट्रपति इब्राहिम ट्राओरे का एक कथित बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने शरिया की पढ़ाई के लिए सऊदी अरब जाने वाले छात्रों से कहा,  अगर आप तकनीकी शिक्षा और कौशल हासिल करने के बजाय केवल शरिया पढ़ने जा रहे हैं, तो वहीं रहें। आपको वापस लौटने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यहां आपकी वापसी की अनुमति नहीं होगी। बताया जा रहा है कि यह टिप्पणी उन्होंने धार्मिक सद्भाव, राष्ट्र निर्माण और अतिवाद के खिलाफ अपनी सरकार की नीति को रेखांकित करते हुए की। हालांकि, इस बयान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति है ट्राओरे?

इब्राहिम ट्राओरे का जन्म 14 मार्च 1988 को हुआ था। उन्होंने सितंबर 2022 में सैन्य तख्तापलट के बाद बुर्किना फासो की सत्ता संभाली। तब उनकी उम्र सिर्फ 35 साल थी। सत्ता में आने के बाद उन्होंने देश को भ्रष्टाचार, विदेशी प्रभाव और जिहादी हिंसा से मुक्त कराने का वादा किया। ट्राओरे खुद को पैन-अफ्रीकी, राष्ट्रवादी और एंटी-इंपीरियलिस्ट नेता मानते हैं।  उन्होंने अल-साहेल स्टेट्स गठबंधन को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि देश की सुरक्षा, संप्रभुता और स्थानीय परंपराओं के आधार पर न्याय व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए। उनके शासन में बुर्किना फासो ने फ्रांस जैसे पश्चिमी देशों से दूरी बढ़ाई और रूस समेत अन्य देशों के साथ अपने संबंध मजबूत किए। हालांकि, देश में सुरक्षा की स्थिति अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

बुर्किना फासो में 63 प्रतिशत है मुस्लिम आबादी

बुर्किना फासो की आबादी करीब 2.2 करोड़ है। 2019 की जनगणना के मुताबिक, यहां लगभग 63.8 प्रतिशत लोग मुस्लिम हैं। इनमें ज्यादातर सुन्नी हैं और मालिकी परंपरा तथा सूफी विचारधारा का प्रभाव है। करीब 26.3 प्रतिशत लोग ईसाई हैं, जबकि लगभग 9 प्रतिशत लोग पारंपरिक अफ्रीकी धर्मों को मानते हैं। देश का संविधान धर्मनिरपेक्ष है और सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने की आजादी देता है।

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