बिम्सटेक में पीएम मोदी ने क्षेत्रीय सहयोग में भारत की मजबूत भूमिका की बात कही, हमारी नीतियों से समूह को नई गति
Bimstec Summit 2025: बिम्सटेक समूह अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भारत के नेतृत्व पर निर्भर करता है। पीएम की पड़ोस पहले नीति, एक्ट ईस्ट नीति, महासागर विजन और इंडो-पैसिफिक के विजन पर ध्यान समूह को अतिरिक्त बल मिलता है।
- Written By: सौरभ शर्मा
बिम्सटेक समिट की छठी बैठक में शामिल सभी देशों के प्रतिनिधि
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की “पड़ोस पहले” और “एक्ट ईस्ट” नीतियां बिम्सटेक समूह को नई गति दे रही हैं। भारत ने महासागर विजन और इंडो-पैसिफिक नीति को अपनाकर बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में सहयोग को मजबूत किया है। बिम्सटेक का संस्थागत ढांचा 2024 में चार्टर के अपनाने के बाद और अधिक प्रभावी हुआ है। भारत के राजनयिक इंद्र मणि पांडे को महासचिव नियुक्त किए जाने के साथ समूह को नई ऊर्जा मिली है।
भारत न केवल बिम्सटेक एजेंडा को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि संगठन की क्षमता निर्माण में भी योगदान दे रहा है। बिम्सटेक सचिवालय को भारत ने 1 मिलियन डॉलर की सहायता दी है और हाल के महीनों में महत्वपूर्ण बैठकों की मेजबानी की है, जिससे समूह की भूमिका और प्रभाव क्षेत्र में बढ़ा है।
सुरक्षा और कनेक्टिविटी में भारत की अग्रणी भूमिका
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भारत बिम्सटेक के सुरक्षा स्तंभ का नेतृत्व कर रहा है और आतंकवाद, उग्रवाद व अंतरराष्ट्रीय अपराधों के खिलाफ कानूनी ढांचा तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। साथ ही, भारत भौतिक, डिजिटल और ऊर्जा कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा दे रहा है। बेंगलुरु में बिम्सटेक ऊर्जा केंद्र स्थापित किया गया है, जो क्षेत्रीय ग्रिड इंटरकनेक्शन के लिए काम कर रहा है। यह पीएम मोदी के ‘एक विश्व, एक सूर्य, एक ग्रिड’ विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
युवा, संस्कृति और व्यापार को बढ़ावा
बिम्सटेक के तहत युवाओं को जोड़ने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने और व्यापार को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। हाल ही में दिल्ली में बिम्सटेक एक्वेटिक चैंपियनशिप, बिम्सटेक बिजनेस समिट और कटक में बाली यात्रा में बिम्सटेक सांस्कृतिक मंडली की भागीदारी हुई। 2025 में सूरजकुंड मेले और अहमदाबाद में बिम्सटेक युवा शिखर सम्मेलन भी प्रस्तावित हैं। भारत ने आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भी महत्वपूर्ण पहल की है, जिससे क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूती मिल रही है।
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1997 में गठित बिम्सटेक को असली गति 2016 में पीएम मोदी के नेतृत्व में मिली, जब ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान गोवा में बिम्सटेक नेताओं को आमंत्रित किया गया था। तब से भारत ने इस समूह को प्राथमिकता दी है और 2019 में शपथ ग्रहण समारोह में भी बिम्सटेक नेताओं को आमंत्रित कर अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
