भारत-इजराइल के बीच डिफेंस डील। इमेज-एआई
India And Israel Defence Deal : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इजरायल यात्रा वैश्विक कूटनीति और रक्षा गलियारों में एक नई इबारत लिखने जा रही है। 2026 की इस राजकीय यात्रा का सबसे बड़ा केंद्र डिफेंस पार्टनरशिप है, जो अब केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं, बल्कि सह-उत्पादन की दिशा में बढ़ चुकी है।
भारत और इजरायल के बीच रक्षा संबंधों का सबसे मजबूत स्तंभ मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। बराक-8 जैसी मिसाइलें, जिन्हें दोनों देशों ने मिलकर बनाया है। आज भारतीय नौसेना और वायु सेना का सुरक्षा कवच हैं। 70 से 100 किमी की रेंज वाली ये मिसाइलें चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों के बीच अरब सागर और हिंद महासागर में भारत की एयर डिफेंस छतरी को अभेद्य बनाती हैं।
इस यात्रा के दौरान मेक इन इंडिया के तहत एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों और बॉर्डर मॉनिटरिंग सिस्टम पर बड़े समझौते की उम्मीद है। इजरायल की स्मार्ट फेंसिंग और थर्मल सेंसर तकनीक कठिन मौसम और रात के अंधेरे में भी घुसपैठ रोकने में सक्षम है।
बदलते दौर में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि साइबर स्पेस और डेटा के जरिए लड़े जा रहे हैं। पीएम मोदी की यात्रा में AI-ड्रिवन कॉम्बैट सिस्टम और काउंटर-ड्रोन आर्किटेक्चर पर विशेष चर्चा होनी है। भारत, इजरायल के हेरॉन और सर्चर जैसे ड्रोन्स का एडवांस वर्जन चाहता है, ताकि वास्तविक समय में दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखी जा सके।
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लाल सागर और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच मोदी की यह यात्रा संदेश देती है कि भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए रूस या अमेरिका जैसे पारंपरिक देशों के अलावा इजरायल जैसे कॉम्बैट-टेस्टेड (युद्ध में परखे हुए) साझेदार पर भरोसा कर रहा है। इजरायल की खासियत यह है कि वह बिना किसी जटिल राजनीतिक शर्त के उच्च तकनीक देने को तैयार रहता है।