बांग्लादेश एनसीपी के संयोजक नाहिद इस्लाम, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bangladesh Election Controversy: बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर और आरोपों का दौर शुरू हो गया है। हाल ही में संपन्न हुए 13वें राष्ट्रीय चुनाव के परिणामों को लेकर अब गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। एनसीपी (NCP) के संयोजक और विपक्षी दल के चीफ व्हिप नाहिद इस्लाम ने एक सनसनीखेज आरोप लगाते हुए बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की जीत पर सवालिया निशान लगा दिया है।
नाहिद इस्लाम का दावा है कि बीएनपी ने यह जीत अकेले अपने दम पर नहीं बल्कि भारत और अपनी धुर विरोधी पार्टी अवामी लीग के साथ ‘कथित सांठगांठ’ करके हासिल की है।
नाहिद इस्लाम ने सार्वजनिक रूप से चुनाव परिणामों को ‘संदिग्ध’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इन नतीजों से पूरी तरह निराश है और उसे लगता है कि चुनाव प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया है। छात्र नेता से राजनीतिज्ञ बने नाहिद का तर्क है कि जिस तरह से नतीजे सामने आए हैं उससे वास्तविक जनमत का गला घोंटा गया है। उन्होंने लोकतंत्र में मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने के लिए पूरी चुनावी प्रक्रिया की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इस पूरे विवाद में सबसे चौंकाने वाला पहलू अवामी लीग का जिक्र है जो शेख हसीना की पार्टी है। नाहिद इस्लाम ने चेतावनी दी है कि अगर महज ‘वोट बैंक’ की राजनीति के लिए अवामी लीग को दोबारा राजनीतिक रूप से स्थापित या पुनर्वासित करने की कोशिश की गई तो देश की जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अवामी लीग के खिलाफ कार्रवाई करने में विफलता की पूरी जिम्मेदारी वर्तमान सरकार की होगी। नाहिद ने संकेत दिया कि यदि पार्टी को फिर से संगठित करने की कोशिशें जारी रहीं तो वे एक व्यापक राजनीतिक प्रतिरोध और आंदोलन का आह्वान करेंगे।
नाहित इस्लाम ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए कहा कि देशभर के विभिन्न जिलों और उपजिलों में अवामी लीग के कार्यालय फिर से खोले जा रहे हैं। उनके अनुसार, यह उन नेताओं की मौजूदगी में हो रहा है जो कई मुकदमों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने इसे एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बताया जिसका उद्देश्य देश के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करना है।
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नाहिद इस्लाम ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हर संवैधानिक और शांतिपूर्ण कदम उठाने को तैयार है। बांग्लादेश की मौजूदा अस्थिर स्थिति में इन आरोपों ने एक नई बहस छेड़ दी है। जानकारों का मानना है कि इन गंभीर आरोपों के बाद आने वाले दिनों में बांग्लादेश में सियासी टकराव और अधिक बढ़ सकता है जिससे वहां की शांति व्यवस्था और द्विपक्षीय संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।