यरुशलम में युद्ध की आहट! रमजान के बीच अल-अक्सा के इमाम गिरफ्तार, क्या टूट जाएगा 1967 का ऐतिहासिक शांति समझौता?

Al-Aqsa Mosque Conflict: यरुशलम के अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली पुलिस की कार्रवाई और इमाम की गिरफ्तारी से 1967 का 'स्टेटस को' टूटने की कगार पर है, जिससे रमजान के दौरान बड़े टकराव की आशंका बढ़ गई है।
War looms in Jerusalem! Al-Aqsa Imam arrested during Ramadan; will the historic 1967 peace agreement be broken?
अल-अक्सा मस्जिद का इमाम गिरफ्तार, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Israel Al-Aqsa Mosque Imam Arrested: यरुशलम के सबसे संवेदनशील धार्मिक स्थल, अल-अक्सा मस्जिद परिसर में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर मध्य-पूर्व को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। 1967 के युद्ध के बाद से चले आ रहे 60 साल पुराने 'स्टेटस को' समझौते पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इजरायली पुलिस की हालिया कार्रवाई, गिरफ्तारियों और बढ़ती पाबंदियों के कारण विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि रमजान के पवित्र महीने में यह स्थिति किसी बड़े और भीषण सैन्य टकराव में बदल सकती है।

क्या है 1967 का ऐतिहासिक समझौता?

वर्ष 1967 के युद्ध के बाद एक विशेष व्यवस्था तय की गई थी जिसके तहत अल-अक्सा मस्जिद परिसर (जिसे मुसलमान 'हरम अल-शरीफ' कहते हैं) में नमाज पढ़ने का विशेष अधिकार केवल मुसलमानों को दिया गया था। इस समझौते के अनुसार, परिसर की प्रशासनिक जिम्मेदारी जॉर्डन समर्थित वक्फ के पास रहती है, जबकि बाहरी सुरक्षा का नियंत्रण इजराइल संभालता है। यहूदी समुदाय इस स्थान को 'टेम्पल माउंट' मानता है, जहाँ प्राचीन काल में उनके पवित्र मंदिर स्थित थे। दशकों से यही नाजुक संतुलन इस क्षेत्र में शांति का आधार बना हुआ था।

रमजान में बढ़ा तनाव

'द गार्जियन' की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल रमजान की शुरुआत के साथ ही इजरायली सुरक्षा एजेंसियों का रुख काफी सख्त हो गया है। मस्जिद के इमाम शेख मोहम्मद अल-अब्बासी को परिसर से हिरासत में लिया गया है जिसने फिलिस्तीनी नागरिकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। इसके अलावा, कई वक्फ कर्मचारियों को प्रशासनिक हिरासत में रखा गया है या उन्हें परिसर में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। फिलिस्तीनी सूत्रों का आरोप है कि इजरायली सुरक्षा बलों ने वक्फ के दफ्तरों में तोड़फोड़ भी की है हालांकि इजरायली पुलिस और शिन बेट ने इन आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

कट्टरपंथी समूहों और राजनीति का प्रभाव

इस तनाव के पीछे इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री ईतामार बेन-ग्विर की नीतियों को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। बेन-ग्विर पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में अल-अक्सा परिसर में यहूदी कट्टरपंथी समूहों की गतिविधियां तेज हुई हैं। वे स्वयं भी परिसर का दौरा कर चुके हैं और वहां यहूदियों को प्रार्थना की अनुमति देने की वकालत करते रहे हैं जिसे पुराने समझौते के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।

छोटी चिंगारी और बड़ा धमाका

अल-अक्सा को लेकर हुआ तनाव पहले भी भीषण युद्धों का कारण बना है। साल 2000 में एरियल शेरोन के विवादित दौरे के बाद 'दूसरा इंतिफादा' भड़का था जो पांच साल तक चला। सबसे हालिया उदाहरण अक्टूबर 2023 का है जब हमास ने अपने हमले को 'अल-अक्सा फ्लड' नाम दिया और दावा किया कि यह मस्जिद में किए जा रहे उल्लंघनों का बदला है। उस हमले के बाद शुरू हुआ गाजा युद्ध आज भी जारी है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए डर है कि इतिहास खुद को दोहरा सकता है।

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