‘दुनिया जिसे साधु मानती, वह शैतान हैं’… पूर्व राजनयिक ने दिखाया मुहम्मद यूनुस का असली चेहरा
Yunus Reality Exposed: बांग्लादेश के पूर्व राजनयिक अमीनुल हक पोलाश ने मोहम्मद यूनुस को 'शैतान' बताते हुए कई खुलासे किए। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक और आर्थिक पकड़ दुनिया की नजर से छिपी हुई है।
- Written By: प्रिया सिंह
बांग्लादेश के पूर्व राजनयिक अमीनुल हक पोलाश और बांग्लादेश की वर्तमान अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस (सोर्स- सोशल मीडिया)
Ex-Diplomat Exposes Muhammad Yunus: बांग्लादेश के पूर्व राजनयिक और खुफिया अधिकारी अमीनुल हक पोलाश ने नोबेल पुरस्कार विजेता और अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस की छवि पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पोलाश ने यूनुस पर एक विशाल आर्थिक नेटवर्क और गुप्त राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, यूनुस की संत जैसी दिखने वाली छवि के पीछे एक गहरी सच्चाई छिपी है, जिसके तहत उन्होंने लेबर लॉ का उल्लंघन किया और भ्रष्टाचार के मामले दबाए।
यूनुस के आर्थिक नेटवर्क की जांच से छोड़ना पड़ा देश
लगभग 10 साल तक राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश सेवा में कार्यरत रहे अमीनुल हक पोलाश ने News18 को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें यूनुस के आर्थिक नेटवर्क की जांच के कारण देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। पोलाश के मुताबिक, जैसे ही उनकी जांच यूनुस के वित्तीय साम्राज्य तक पहुंची, उन्हें ‘न्यूट्रलाइज’ करने और ‘गायब’ करने की धमकियां मिलने लगीं। भारत में उनकी राजनयिक पोस्ट अचानक वापस बुला ली गई, जिससे उन्हें लगा कि देश लौटना जान जोखिम में डालने जैसा होगा। उन्होंने कहा कि निर्वासन उनका मजबूरी का फैसला था।
माइक्रोक्रेडिट का दावा झूठा
पोलाश ने यूनुस के उस दावे को भी चुनौती दी जिसमें वे माइक्रोक्रेडिट के आविष्कारक होने का दावा करते हैं। पोलाश के अनुसार, दस्तावेज दर्शाते हैं कि माइक्रोक्रेडिट की असली अवधारणा यूनुस की नहीं थी। उन्होंने इसे चुराया और फिर से ब्रांड किया।
यह वास्तव में फोर्ड फाउंडेशन द्वारा समर्थित एक विश्वविद्यालय प्रोजेक्ट थी, जिसे स्वपन अदनान, नसीरुद्दीन और एच.आई. लतीफी जैसे युवा रिसर्चर्स ने डिजाइन किया था। समय के साथ इन सभी नामों को हटा दिया गया और आविष्कार का पूरा श्रेय अकेले यूनुस को मिल गया।
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ग्रामीण बैंक के पैसों का निजीकरण और टैक्स चोरी
पोलाश ने यूनुस पर संस्थाओं पर कब्जा करने और लोगों के पैसे का निजीकरण करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि ग्रामीण बैंक के पैसों को सामाजिक उन्नयन फंड से निकालकर एक निजी संस्था ‘ग्रामीण कल्याण’ में भेजा गया। इसके बाद करीब 50 संस्थाओं का एक नेटवर्क बन गया, जिसका अंतिम नियंत्रण सिर्फ यूनुस के पास था।
पोलाश ने ग्रामीण टेलिकॉम का उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनी ने 2022 तक 10,890 करोड़ टका का डिविडेंड कमाया, लेकिन मजदूरों को हिस्सा नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस ने टैक्स से बचने के लिए लगभग 100 करोड़ टका अपनी ही बनाई ट्रस्टों में लोन के रूप में ट्रांसफर किए।
अंतरिम सरकार बनने के बाद मामले गायब
पोलाश ने सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट लेबर केस को बताया। उन्होंने कहा कि जिस आदमी को गरीबों का मसीहा माना जाता था, उसने बेसिक लेबर लॉ का भी पालन नहीं किया। उन्होंने खुलासा किया कि 2024 में अंतरिम सरकार बनने के बाद यूनुस के खिलाफ लेबर केस की सजा गायब हो गई।
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एंटी-करप्शन कमिशन ने बड़े मामलों को वापस ले लिया और 666 करोड़ टका का भारी टैक्स भी रहस्यमय तरीके से माफ कर दिया गया। पोलाश ने इसे ‘कब्जे हुए राज्य’ की पहचान बताया, जहां कानून सिर्फ यूनुस के विरोधियों पर लागू होता है। उन्होंने कहा कि यूनुस को उनके पदकों से नहीं, बल्कि सत्ता में उनके वर्तमान कार्यों से परखा जाना चाहिए।
