

Bangladesh Measles Crisis: बांग्लादेश में स्वास्थ्य की स्थिति बेहद खराब हो गई है और चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है। देश भर में खसरे का कहर बहुत ही तेजी से फैल रहा है जिससे सभी आम लोग काफी ज्यादा डरे हुए हैं। हाल ही में बुधवार को इस खतरनाक बीमारी से सात और बेगुनाह बच्चों की दुखद मौत की खबर सामने आई है। इस भयानक महामारी ने मासूम बच्चों को सबसे ज्यादा अपना शिकार बनाया है जिससे लोगों के बीच भारी दहशत है।
अब तक इस गंभीर बीमारी से होने वाली मौतों का कुल डरावना आंकड़ा 601 के पार पहुंच गया है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने पिछले 24 घंटों में इन नई मौतों की आधिकारिक जानकारी विस्तार से दी है। मई महीने में हालात और भी ज्यादा भयावह हो गए जब सैकड़ों लोगों ने तड़प कर अपनी जान गंवाई। पूरे देश में इस भयंकर बीमारी को जल्द रोकने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाने की बहुत सख्त जरूरत है।
देश में पिछले 24 घंटों के दौरान 1,210 नए संदिग्ध मरीजों के मामलों की पहचान हुई है। इस बहुत ही तेज वृद्धि के कारण कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 74,572 तक पहुंच गई है। वहीं 55 नए मामले आने से कुल मरीजों की संख्या 9,191 हो गई है। ताजा रिपोर्ट और आंकड़ों के अनुसार अब तक 90 मौतों की आधिकारिक रूप से पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा 511 मौतों को अभी भी संदिग्ध खसरे की गंभीर श्रेणी में रखा गया है। हर दिन बढ़ रहे इन भयंकर और डरावने आंकड़ों ने पूरे देश के लोगों को झकझोर कर रख दिया है। पूरे देश में यह भयंकर स्वास्थ्य संकट अब लगातार बहुत ही ज्यादा गहराता जा रहा है। केवल मई के महीने में ही खसरे के लक्षणों के कारण 309 लोगों की दर्दनाक जान गई है। केवल 9, 16 और 23 मई को छोड़कर बाकी दिन हर रोज 1,000 से ज्यादा मामले सामने आए।
सरकार का विशेष खसरा-रूबेला टीकाकरण का अहम अभियान 20 मई को खत्म हो चुका है। हैरानी की बात है कि यह बड़ा अभियान अपने प्रारंभिक चरण में ही पूरी तरह समाप्त हो गया। इसके बावजूद बीमारी का खतरनाक फैलाव बिल्कुल नहीं रुका और मौतों का दुखद सिलसिला जारी है।
यूनिसेफ ने अंतरिम सरकार को वैक्सीन की भारी कमी पर पहले ही कड़ी चेतावनी दी थी। यूनिसेफ प्रतिनिधि राना फ्लावर्स ने बताया कि 2024 से ही सरकार को लगातार आगाह किया जा रहा था। स्वास्थ्य अधिकारियों को लगातार पत्रों और उच्च स्तरीय बैठकों के माध्यम से खतरे की पूरी जानकारी दी गई थी।
यूनिसेफ ने इस बेहद गंभीर मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्रालय को पांच से छह अहम पत्र भेजे थे। 10 अलग-अलग उच्च स्तरीय बैठकों में भी इस भयानक संकट पर गहरी चिंता भी जताई गई थी। सरकार को 2024 से 2026 तक आपूर्ति के लिए समय रहते टीकों का ऑर्डर देने को कहा गया था।