

Bangladesh Journalists Attacks Harassment Report: बांग्लादेश में पत्रकारों पर हिंसा और उत्पीड़न तेजी से बढ़ रहा है। रिसर्च संस्था मीडिया इनिशिएटिव फॉर डेवलपमेंट (MID) की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट अनुसार पिछले 3 महीनों में 112 घटनाओं में कम से कम 162 पत्रकार प्रभावित हुए।
पत्रकारों को जान से मारने की धमकियों, शारीरिक हमलों, गोलीबारी व केसों का सामना करना पड़ा। फील्ड में काम करने वाले और शहरों से बाहर तैनात प्रिंट मीडिया पत्रकार सर्वाधिक प्रभावित हुए। MID अनुसार ये हमले प्रेस की आजादी और लोगों के सूचना अधिकार पर सीधा प्रहार हैं।
स्थानीय मीडिया व 'ढाका ट्रिब्यून' अनुसार पिछले तीन महीनों में पत्रकारों की स्थिति खराब रही है। MID की रिपोर्ट अनुसार जुलाई में 39 घटनाओं में कुल 50 पत्रकार प्रभावित हुए थे। जुलाई में जान से मारने की धमकियों का हिस्सा 48.7% था, जबकि शारीरिक हमले 28.2% रहे।
इसके बाद अगस्त का महीना सबसे बुरा साबित हुआ, जिसमें हिंसा की सर्वाधिक घटनाएं दर्ज हुईं। अगस्त में 44 घटनाओं में 67 पत्रकार प्रभावित हुए, जो जुलाई से 12.8 प्रतिशत अधिक था। सितंबर में 29 घटनाओं में 45 पत्रकारों को हिंसा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
इस अवधि में पत्रकारों के घरों-दफ्तरों पर हमले, गोलीबारी, अपहरण और कानूनी उत्पीड़न की घटनाएं हुईं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि बांग्लादेश में निष्पक्ष पत्रकारिता करना बेहद खतरनाक हो गया है।
रिपोर्ट अनुसार हिंसा का शिकार सबसे ज्यादा प्रिंट मीडिया में कार्यरत पत्रकार बने। प्रभावित 162 पत्रकारों में 89 दैनिक समाचार पत्रों, 53 टीवी और 20 ऑनलाइन आउटलेट्स से थे। बड़े शहरों से बाहर और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राउंड जीरो पर कार्यरत रिपोर्टर सबसे अधिक प्रभावित हुए।
वे बिना सुरक्षा के जोखिम भरे इलाकों में खबरें कवर करने को मजबूर हैं। पत्रकारों के खिलाफ हिंसा की ये घटनाएं बांग्लादेश के 30 से ज्यादा जिलों में दर्ज हुईं। ढाका, चटगांव, सिराजगंज, बारीसाल और सिलहट डिवीजनों में उत्पीड़न की घटनाएं अधिक देखी गईं।
इन क्षेत्रों में पत्रकारों को डराने के लिए धमकियों और मुकदमों का सहारा लिया गया। इस लगातार बढ़ते उत्पीड़न के कारण क्षेत्रीय पत्रकारों में गहरा डर बना हुआ है।
रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि हमलों के बाद ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हो रही है। ढाका ट्रिब्यून अनुसार MID के कार्यकारी निदेशक राशदुल हसन ने इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताया। राशदुल हसन ने कहा कि यह हिंसा जनता के सूचना अधिकार पर सीधा प्रहार है।
सरकार को हर घटना की निष्पक्ष व त्वरित जांच कर दोषियों को कड़ी सजा देनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि बांग्लादेश सरकार पत्रकारों की सुरक्षा हेतु कड़े कदम उठाए। अगर हमलावरों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो मीडिया की स्वतंत्रता समाप्त हो जाएगी।
पत्रकार संगठनों ने भी निर्भीक माहौल तैयार करने की अपील की है। समय पर कदम न उठाने से बांग्लादेश में स्वतंत्र मीडिया का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।