'हमें बचा लो...', बॉर्डर खोलने की गुहार, तारिक रहमान की वापसी से दहशत में बांग्लादेशी हिंदू

Bangladesh Hindu Violence: बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। हालिया मॉब लिंचिंग मामलों और राजनीतिक अस्थिरता के बीच हिंदू समुदाय खुद को असुरक्षित...
Tarique Rahman
तारिक रहमान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Bangladesh News In Hindi: बांग्लादेश में दिपू चंद्र दास और अमृत मंडल की नृशंस मॉब लिंचिंग की घटनाओं ने हिंदू समुदाय को गहरे सदमे और भय में डाल दिया है। इन घटनाओं के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले हिंदुओं का कहना है कि वे इस्लामी भीड़ की हिंसा के साये में जीवन गुजारने को मजबूर हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि उन्हें भारत से मदद की गुहार लगाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आ रहा।

गुरुवार को यह डर और बढ़ गया, जब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान के समर्थन में राजनीतिक हलचल तेज हुई। तारिक रहमान को उनके कथित कट्टरपंथी रुख के लिए जाना जाता है, और हिंदू समुदाय उन्हें अपने भविष्य के लिए बड़ा खतरा मानता है। कई हिंदू नागरिकों का कहना है कि अगर BNP सत्ता में आती है, तो अल्पसंख्यकों के लिए हालात और भी खराब हो सकते हैं।

हिंदू समुदाय के बीच डर का माहौल

रिपोर्टों के अनुसार, रंगपुर, ढाका, चित्तागांग और मयमनसिंह जैसे इलाकों में हिंदू समुदाय के बीच डर का माहौल सबसे ज्यादा है। रंगपुर के 52 वर्षीय एक हिंदू निवासी ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में कहा कि हम रोज अपने धर्म को लेकर अपमान सहते हैं, लेकिन विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। सड़क पर मिलने वाले ताने कभी भी हिंसक भीड़ में बदल सकते हैं। हमें डर है कि कहीं हमारा अंजाम भी दिपू या अमृत जैसा न हो जाए।

तारिक रहमान की वापसी से बढ़ी चिंता

ढाका में रहने वाले एक अन्य हिंदू नागरिक ने कहा कि दिपू दास की लिंचिंग के बाद से ही समुदाय में भय व्याप्त है और अब तारिक रहमान की राजनीतिक सक्रियता ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। उनके मुताबिक, अगर BNP सत्ता में आई तो हिंदुओं के लिए हालात और बिगड़ सकते हैं। शेख हसीना की अवामी लीग ही अब तक हमारे लिए एक ढाल बनी हुई थी।

सुरक्षा को लेकर उठाने लगी आवाज

इस चिंता की लहर सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं है। भारत के महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में बसे बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थियों तक भी यह डर पहुंच चुका है। महाराष्ट्र के गढ़चिरोली, चंद्रपुर और छत्तीसगढ़ के पाखांजूर जैसे इलाकों में बसे शरणार्थी समुदायों ने बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर आवाज उठानी शुरू कर दी है।

सीमा पर विरोध प्रदर्शन

निखिल बंगला समन्वय समिति के अध्यक्ष डॉ. सुभोध बिस्वास का कहना है कि अब सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। उनके अनुसार, बांग्लादेश के हिंदू संकट की घड़ी में केवल भारत पर भरोसा कर सकते हैं। लोग मारे जा रहे हैं लेकिन सीमाएं बंद हैं। हम सीमा पर विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं।

अनुमानों के मुताबिक, बांग्लादेश में करीब 2.5 करोड़ हिंदू रहते हैं। समुदाय के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कोई छोटी आबादी नहीं है और अगर हालात नहीं सुधरे तो बड़े पैमाने पर संकट खड़ा हो सकता है। मयमनसिंह के एक हिंदू निवासी ने कहा कि भारत की सीमाएं खोलने का मतलब सामूहिक पलायन नहीं, बल्कि हिंसा से बचने का एक विकल्प होना चाहिए।

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