बांग्लादेशी सरकार ने शेख हसीना पर चलाया चाबुक, आवामी लीग के स्टूडेंट विंग पर लगाया बैन
बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व गठित अंतरिम सरकार ने शेख हसीना को बड़ा झटका दिया है। शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के स्टूडेंट युनिट बांग्लादेश छात्र लीग पर बैन लगा दिया है।
- Written By: Saurabh Pal
शेख हसीना ( फोटो-सोर्स सोशल मीडिय)
ढाकाः बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में गठित अंतरिम सरकार ने शेख हसीना को बड़ा झटका दिया है। शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के स्टूडेंट युनिट बांग्लादेश छात्र लीग पर बैन लगा दिया है। इससे पूर्व मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के कार्यालय ने कहा था कि अंतरिम सरकार अवामी लीग और समान विचारधारा वाली पार्टियों को राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने से रोकेगी।
मोहम्मद यूनुस के कार्यालय के इस बयान के बाद लग रहा था कि बांग्लादेश की सरकार आवामी लीग पर बैन लगा सकती है। हालांकि अभी तक आवामी लीग के स्टूडेंट यूनिट पर ही बैन लगा है। इस कार्रवाई को शुरुआत माना जा रहा है। खास बात ये है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद मोहम्मद यूनुस ने उन पर लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं उन्होंने देश में दोबारा लोकतंत्र की नींव बनाने का दावा किया था, सरकार की इस कार्रवाई के बाद जम्हूरियत के वादे हवा हवाई होते दिख रहे हैं।
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बांग्लादेश की आजादी में आवामी लीग की भूमिका
बांग्लादेश अवामी लीग (बांग्लादेश पीपुल्स लीग) जिसे अवामी लीग के रूप में जाना जाता है। यह बांग्लादेश के प्रमुख राजनीतिक दलों में से एक है। अवामी लीग देश की सबसे पुरानी पार्टी है। इस पार्टी ने बांग्लादेश मुक्ति युद्ध से पहले और बाद में बांग्लादेश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मौजूदा समय में अवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना है। देश छोड़ने से पहले उन्होंने प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि पार्टी की अध्यक्ष वह अब भी हैं।
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इसलिए शेख हसीना को छोड़ना पड़ा देश
गौरतलब है कि बांग्लादेश में विपक्षी शेख हसीना पर तानाशाही का आरोप लगा रहे थे। विपक्षी इस कदर विरोध पर उतर गए थे कि उन्होंने आम चुनाव में हिस्सा भी नहीं लिया। पिछले 20 सालों से बांग्लादेश की सत्ता में बैठी शेख हसीना इन आरोपों को सिरे से खारिज करती रहीं। इस दौरान एक आरक्षण का मुद्दा विपक्ष के हाथ लगा जिसको लेकर बांग्लादेश में छात्रों का विरोध चल रहा है। जिसके बाद छात्रों का विरोध प्रदर्शन एक बड़े आंदोलन में तब्दील हो गया। जनता ने प्रधानमंत्री आवास पर चढ़ाई कर दी। इसके बाद शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया और देश छोड़ दिया।
