होर्मुज में फंसा तेल से लदा बांग्लादेशी जहाज...ढाका में हाहाकार, घंटो इंतजार के बाद भी नहीं मिल रहा पेट्रोल

Bangladesh News: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी ने बांग्लादेश को ऊर्जा के अंधेरे में धकेल दिया है। 95% ईंधन आयात ठप होने से पेट्रोल पंपों पर हाहाकार और स्कूल-कॉलेज बंद करने की नौबत आ गई है।
Oil Crisis in Bangladesh
बांग्लादेश में ऊर्जा संकट (सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Energy Crisis in Bangladesh: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद से दक्षिण एशिया, विशेषकर बांग्लादेश, गहरे ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। बांग्लादेश की अधिकांश ऊर्जा जरूरतें आयातित ईंधन पर निर्भर हैं, और इस संकट ने देश की अर्थव्यवस्था को न केवल दबाव में डाल दिया है, बल्कि देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थितियां पैदा कर दी हैं।

बांग्लादेश अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा विदेश से आयात करता है, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जलमार्ग में बढ़ते तनाव ने इस आयात प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इस संकट का सबसे प्रत्यक्ष असर देश की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है, जिससे बांग्लादेश में बिजली कटौती, पेट्रोल की भारी किल्लत और सार्वजनिक सेवाओं का संकट उत्पन्न हो गया है।

पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों की लंबी कतारें

देशभर के पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं, जो किसी युद्धग्रस्त क्षेत्र के दृश्य से मेल खाती हैं। लोग घंटों, बल्कि कई बार आधे-आधे दिन तक अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। कोक्स बाजार जैसे पर्यटन शहरों में स्थिति और भी विकट है, जहां लंबी दूरी की बसों के ड्राइवरों को डीजल भरवाने के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। एक स्थानीय नागरिक ने अलजजीरा को बताया कि उन्हें अपनी बस में डीजल भरवाने के लिए करीब पांच घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा। इस अभूतपूर्व स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने तेल की राशनिंग शुरू कर दी है। अब हर वाहन को एक निश्चित मात्रा में ही पेट्रोल या डीजल दिया जा रहा है, जिससे सामान्य नागरिकों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

स्कूल-कॉलेज पहले ही बंद

ईंधन संकट के कारण सरकार ने बिजली बचाने के लिए कामकाजी घंटों में कटौती की है ताकि नेशनल ग्रिड पर दबाव कम किया जा सके। इसके अलावा, छात्रों और शिक्षकों के लिए परिवहन की भारी कमी के चलते, स्कूलों और कॉलेजों को भी बंद कर दिया गया है।

बांग्लादेश की यह स्थिति वैश्विक संघर्ष का परिणाम है, जिसका खामियाजा इस छोटे से देश की जनता भुगत रही है। अब बांग्लादेशी जनता में इस अंतरराष्ट्रीय संकट को लेकर गुस्सा और असंतोष बढ़ता जा रहा है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि एक दूर देश में चल रहे संघर्ष का प्रभाव उनके दैनिक जीवन पर क्यों पड़ रहा है, और वे इस संकट से उबरने के लिए किसे दोषी ठहराएं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com