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Bangladesh Politics: अमेरिकी डिप्लोमैट और जमात-ए-इस्लामी की सीक्रेट मीटिंग ने बढ़ाई भारत की चिंता

US Jamaat meeting: बांग्लादेश में चुनाव से पहले अमेरिकी राजनयिक की जमात-ए-इस्लामी नेताओं से मुलाकात ने हड़कंप मचा दिया है, जिससे भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय संबंधों पर कूटनीतिक सवाल खड़े हो गए हैं।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Jan 24, 2026 | 07:00 AM

बांग्लादेश चुनाव से पहले अमेरिकी राजनयिक की जमात-ए-इस्लामी नेताओं से मुलाकात (सोर्स-सोशल मीडिया)

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US diplomat and Jamaat engagement: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले वहां की राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। हाल ही में ढाका में अमेरिकी राजनयिक और कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के बीच एक गोपनीय बैठक हुई है। इस मुलाकात ने न केवल बांग्लादेश के आंतरिक लोकतंत्र बल्कि भारत-अमेरिका राजनयिक संबंधों के प्रभाव पर भी गंभीर चर्चा छेड़ दी है। भारत के लिए यह घटनाक्रम अमेरिकी राजनयिक और जमात की भागीदारी के रूप में एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बनकर उभरा है।

अमेरिकी राजनयिक का गुप्त संवाद

अमेरिकी अखबार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, ढाका में तैनात एक अमेरिकी राजनयिक ने कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के नेताओं के साथ गोपनीय मुलाकात की है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 1 दिसंबर 2025 को हुई इस बंद कमरे की बैठक में अमेरिका ने जमात के साथ बेहतर संबंध बनाने की इच्छा जाहिर की है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अमेरिका का यह कदम भारत और उसके पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों में दरार पैदा कर सकता है।

चुनाव में जमात का बढ़ता प्रभाव

बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वहां की सियासी हलचल और जमात का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। अभी जो माहौल नजर आ रहा है, उससे विशेषज्ञों को लग रहा है कि जमात-ए-इस्लामी इस बार चुनावों में एक ‘बिग प्लेयर’ बनकर उभर सकती है। सर्वे के अनुसार यह पार्टी मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के काफी करीब पहुंचती हुई दिखाई दे रही है।

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अमेरिकी दूतावास का आधिकारिक पक्ष

ढाका में तैनात अमेरिकी दूतावास के एक राजनयिक ने पत्रकारों से ऑफ-द-रिकॉर्ड बातचीत में स्वीकार किया कि वे अब जमात को नजरअंदाज नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन को उम्मीद है कि आगामी चुनावों में यह पार्टी अपने पिछले प्रदर्शन से कहीं ज्यादा बेहतर परिणाम हासिल करने में सफल रहेगी। हालांकि, अमेरिकी दूतावास की प्रवक्ता मोनिका शी ने स्पष्ट किया कि वे किसी विशेष दल का पक्ष नहीं ले रहे और यह केवल रूटीन संवाद था।

जमात का बदलता जनाधार और रणनीति

इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट (IRI) द्वारा दिसंबर में किए गए एक ताजा जनमत सर्वेक्षण के अनुसार करीब 53% लोगों ने जमात-ए-इस्लामी को पसंद किया है। पार्टी अब भ्रष्टाचार विरोधी और कल्याणकारी एजेंडे के सहारे अपनी पुरानी कट्टरपंथी छवि को बदलने की कोशिश कर रही है ताकि वह नया जनाधार बना सके। हालांकि, उनके इस बदलाव से बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदाय और उदारवादी गुट अभी भी काफी असहज और डरे हुए महसूस कर रहे हैं।

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भारत की सुरक्षा और कूटनीतिक चिंताएं

भारत के लिए जमात-ए-इस्लामी का उदय चिंता का विषय है क्योंकि पार्टी के तार ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान से जुड़े हुए माने जाते हैं। भारत इस पार्टी को 1971 के मुक्ति संग्राम के विरोध और कट्टरपंथी विचारधारा के कारण हमेशा संदेह की दृष्टि से देखता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और जमात के बीच बढ़ती नजदीकियां भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक नई दरार पैदा कर सकती हैं।

विशेषज्ञों का विश्लेषण और क्षेत्रीय असर

साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के निदेशक माइकल कुगलमैन ने कहा है कि जमात और अमेरिका के बीच संवाद भारत के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की बांग्लादेश नीति में पिछले कई वर्षों से जमात का विरोध एक सबसे प्रमुख स्तंभ रहा है। हसीना सरकार के पतन के बाद जिस तरह से इस्लामी समूहों ने अपनी पकड़ मजबूत की है, उससे क्षेत्रीय स्थिरता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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Frequently Asked Questions

  • Que: बांग्लादेश में आम चुनाव कब होने वाले हैं?

    Ans: बांग्लादेश में आम चुनाव 12 फरवरी 2026 को आयोजित होने वाले हैं।

  • Que: जमात-ए-इस्लामी और अमेरिकी राजनयिक की मुलाकात की जानकारी किसने दी?

    Ans: इस गोपनीय बैठक की जानकारी अमेरिकी अखबार 'द वॉशिंगटन पोस्ट' की एक रिपोर्ट के माध्यम से सामने आई है।

  • Que: सर्वेक्षण के अनुसार जमात-ए-इस्लामी की लोकप्रियता कितनी है?

    Ans: IRI के जनमत सर्वेक्षण के अनुसार, बांग्लादेश के लगभग 53% लोगों ने जमात-ए-इस्लामी को पसंद किया है।

  • Que: भारत जमात-ए-इस्लामी को संदेह की दृष्टि से क्यों देखता है?

    Ans: भारत 1971 के मुक्ति संग्राम के विरोध और पार्टी के पाकिस्तान के साथ कथित वैचारिक संबंधों के कारण उसे संदेह से देखता है।

  • Que: अमेरिकी दूतावास ने इस बैठक पर क्या सफाई दी है?

    Ans: प्रवक्ता मोनिका शी ने कहा कि यह एक 'रूटीन और ऑफ-द-रिकॉर्ड' चर्चा थी और अमेरिका किसी भी दल का समर्थन नहीं करता।

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Published On: Jan 24, 2026 | 07:00 AM

Topics:  

  • America
  • Bangladesh
  • Bangladesh Election
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