जमात-ए इस्लामी ने घोषणा पत्र जारी किया (सोर्स- सोशल मीडिया)
Jamaat-e-Islami Manifesto: बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव के लिए मतदान होने वाले हैं, इससे पहले पड़ोसी मुल्क में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। इसी बीच इस्लामिक रूढ़िवादी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने बुधवार को अपना चुनावी घोषणापत्र जारी किया। घोषणापत्र में पार्टी ने भारत सहित सभी पड़ोसी देशों के साथ रचनात्मक, सहयोगात्मक और सम्मानजनक संबंध बनाए रखने का वादा किया है।
घोषणापत्र में कहा गया है कि भारत, भूटान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव और थाईलैंड के साथ शांतिपूर्ण, मित्रतापूर्ण और सहयोगी संबंध स्थापित किए जाएंगे। जमात-ए-इस्लामी ने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और साझा समृद्धि के लिए संवाद और सहयोग को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है। पार्टी का कहना है कि ये रिश्ते आपसी सम्मान, निष्पक्षता और साझा हितों पर आधारित होंगे।
पार्टी ने बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूत करने और उसके पासपोर्ट की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ाने का भी संकल्प लिया है। घोषणापत्र में कहा गया है कि ऐसे ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिससे बांग्लादेशी नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाया जा सके।
जमात-ए-इस्लामी के अनुसार, मुस्लिम देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना उसकी विदेश नीति की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होगा। इसके साथ ही पूर्वी यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देशों के साथ कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के विस्तार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों में बांग्लादेश की सक्रिय भागीदारी को और सशक्त बनाने की बात कही गई है। पार्टी ने शांति, सुरक्षा, मानवाधिकार और आर्थिक विकास जैसी वैश्विक चुनौतियों पर संयुक्त राष्ट्र के मंच से प्रभावी भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया है।
इसके अलावा जमात ने रोहिंग्या संकट के समाधान को भी अपने एजेंडे में शामिल किया है। पार्टी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सहयोग से रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वैच्छिक वापसी के प्रयास तेज करने की बात कही है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में बांग्लादेश की भागीदारी जारी रखने का भी वादा किया गया है।
यह घोषणापत्र ऐसे समय में जारी किया गया है जब बांग्लादेश में 12 फरवरी को राष्ट्रीय चुनाव और संवैधानिक जनमत संग्रह होने जा रहा है। सत्तारूढ़ आवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी प्रमुख राजनीतिक ताकतों के रूप में उभरी हैं।
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जुलाई 2024 में हुए ‘जुलाई जनआंदोलन’ के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी, जिसके बाद देश की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। मौजूदा हालात को बांग्लादेश के इतिहास का एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।