नई दिल्ली में आयोजित होने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिखर सम्मेलन में चीन भेजेगा अपना प्रतिनिधिमंडल (सोर्स-सोशल मीडिया)
China India AI cooperation summit: नई दिल्ली में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाले ऐतिहासिक AI शिखर सम्मेलन में चीन की भागीदारी की खबरें सामने आ रही हैं। चीन के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक उप-मंत्री इस महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर सकते हैं जिससे रिश्तों में जमी बर्फ पिघलती दिख रही है। भारतीय दूतावास ने चीनी प्रतिनिधियों के वीजा के लिए पहले ही संपर्क किया है जो दोनों देशों के बीच सहयोग की नई दिशा तय करेगा। यह पहली बार होगा जब 2020 के सीमा विवाद के बाद चीन इतने बड़े तकनीकी मंच पर भारत के साथ सार्वजनिक रूप से शामिल होगा।
भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों से जारी तनाव अब धीरे-धीरे कम होता हुआ स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने चीनी प्रतिनिधियों के लिए वीजा व्यवस्था के संबंध में अधिकारियों से सक्रिय रूप से संपर्क करना शुरू कर दिया है। यह कदम आगामी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिखर सम्मेलन को सफल बनाने के लिए दोनों देशों की साझा तकनीकी और कूटनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
नई दिल्ली में 16 से 20 फरवरी तक चलने वाला यह अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन वैश्विक एआई नियमन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ‘द एशिया ग्रुप’ के अनुसार चीनी नीति-निर्माता AI के नए नियमों और सुरक्षा मानकों पर भारत के साथ निरंतर संवाद करना चाहते हैं। भारत ने औपचारिक रूप से पिछले साल दिसंबर के अंत में ही चीन को इस वैश्विक कार्यक्रम में शामिल होने का न्यौता भेज दिया था।
वर्ष 2020 की घातक सीमा झड़प के बाद दोनों देशों के व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों में एक बहुत बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। तनाव के कारण भारत ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए टिकटॉक जैसे कई लोकप्रिय चीनी मोबाइल ऐप्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि तियानजिन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद अब संबंधों में स्थिरता के स्पष्ट संकेत मिलने लगे हैं।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स और एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोडेई जैसी कई बड़ी वैश्विक हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है। हालांकि सम्मेलन की तारीखें चीन के सबसे बड़े वार्षिक त्योहार लूनर न्यू ईयर के अवकाश के साथ मेल खा रही हैं जो एक बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद चीन वैश्विक AI विकास में अपनी भूमिका मजबूत करने के लिए शंघाई सहयोग संगठन जैसे मंचों का अब सक्रिय उपयोग कर रहा है।
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रिश्तों में आई इस नरमी का असर केवल सम्मेलनों तक सीमित नहीं है बल्कि सीधी उड़ानों और पर्यटक वीजा की बहाली पर भी चर्चा हो रही है। चीनी सरकारी मीडिया ने भी इस शिखर सम्मेलन में अपनी भागीदारी को लेकर सकारात्मक संकेत देते हुए विभिन्न भारतीय रिपोर्ट्स का भी हवाला दिया है। चीन का यह संभावित दौरा न केवल तकनीकी क्षेत्र बल्कि संपूर्ण द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों के लिए एक बहुत ही शुभ संकेत माना जा रहा है।