बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसा बढ़ी (सोर्स-सोशल मीडिया)
Rising Political Violence In Bangladesh: बांग्लादेश में होने वाले आगामी राष्ट्रीय चुनावों से पहले देशभर में सुरक्षा की स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण और चिंताजनक हो गई है। बांग्लादेश में बढ़ती राजनीतिक हिंसा के कारण आम जनता और सुरक्षा एजेंसियां दोनों ही वर्तमान में भारी दबाव में नजर आ रहे हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में चुनाव पूर्व अशांति की घटनाओं में बहुत तेजी आई है। मानवाधिकार संगठनों ने राजनीतिक दलों के बीच बढ़ते टकराव को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है और सभी से शांति की अपील की है।
ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन आइन ओ सालिश केंद्र की हालिया रिपोर्ट ने देश की बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी महीने में राजनीतिक हिंसा की कुल 75 बड़ी घटनाएं देशभर के विभिन्न हिस्सों में दर्ज की गई हैं। इन हिंसक घटनाओं में अब तक 11 लोगों की जान चली गई है और 616 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
दिसंबर 2025 की तुलना में जनवरी में हुई हिंसा के आंकड़ों में लगभग चार गुना तक का भारी इजाफा देखा गया है। दिसंबर में केवल 18 घटनाएं हुई थीं जिनमें 4 लोगों की मौत हुई थी और 268 लोग पूरी तरह घायल हुए थे। आंकड़ों का यह अंतर बताता है कि जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है आपसी तनाव बढ़ता जा रहा है।
चुनाव आयोग द्वारा 22 जनवरी को आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा करने के बाद से ही हिंसक झड़पों की गति में और तेजी आई है। एएसके की रिपोर्ट बताती है कि 21 से 31 जनवरी के बीच ही 49 अलग-अलग हिंसक झड़पें पुलिस और दलों के बीच हुई हैं। इन दस दिनों के भीतर ही चार लोगों की दुखद मौत हुई और लगभग 414 लोग बुरी तरह जख्मी हो गए हैं।
राजनीतिक अस्थिरता का बुरा असर अब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया कर्मियों और पत्रकारों पर भी साफ दिखने लगा है। जनवरी में अपनी ड्यूटी करने के दौरान पत्रकारों पर हमले या उनके काम में बाधा डालने की 16 घटनाएं सामने आई हैं। दिसंबर के मुकाबले यह संख्या काफी अधिक है जिससे अब देश में प्रेस की आजादी पर भी खतरा मंडराने लगा है।
हिंसा का यह दौर केवल आपसी झड़पों तक सीमित नहीं है बल्कि अब चुनावी बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जा रहा है। उपद्रवियों द्वारा कई निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों के चुनावी कैंपों, पार्टी कार्यालयों और निजी वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की गई है। यहां तक कि मतदान केंद्रों की सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को भी लूट लिया गया है।
देश के कई संवेदनशील इलाकों से गोलीबारी, चाकूबाजी और बमबारी की खबरें लगातार आ रही हैं जो आम नागरिकों को डरा रही हैं। चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा को लेकर अब स्थानीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों ने भी सरकार के समक्ष गंभीर चिंताएं जताई हैं। कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर अब नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का भारी दबाव है।
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हैरानी की बात यह है कि जो दल पहले शेख हसीना की सरकार को हटाने के लिए एकजुट थे वे अब सत्ता के लिए लड़ रहे हैं। मोहम्मद यूनुस के साथ गठबंधन करने वाले ये राजनीतिक दल अब आगामी चुनाव जीतने के लिए आपस में ही हिंसक हो गए हैं। यह आपसी सत्ता संघर्ष ही बांग्लादेश में वर्तमान अशांति और गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा करने का मुख्य कारण बना है।
मानवाधिकार संगठन ने सभी राजनीतिक दलों से तुरंत संयम बरतने और चुनाव प्रचार के दौरान शांति बनाए रखने की पुरजोर अपील की है। कानून व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए सुरक्षा बलों को अब और अधिक मुस्तैद रहने की सख्त आवश्यकता है। अगर हिंसा इसी तरह जारी रही तो 12 फरवरी को होने वाले निष्पक्ष मतदान पर बड़ा संकट आ सकता है।
Ans: बांग्लादेश में राष्ट्रीय चुनाव आगामी 12 फरवरी को आयोजित होने वाले हैं।
Ans: जनवरी में हुई राजनीतिक हिंसा में 11 लोगों की मौत हुई है और 616 लोग घायल हुए हैं।
Ans: ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन 'आइन ओ सालिश केंद्र' (एएसके) ने यह रिपोर्ट जारी की है।
Ans: हां, जनवरी महीने में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा और बाधा की कुल 16 घटनाएं दर्ज की गई हैं।
Ans: चुनावी कैंपों, पार्टी कार्यालयों, वाहनों और मतदान केंद्रों के सीसीटीवी कैमरों में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई है।